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युवाओं को खोखला कर रही डायबिटीज 1.5, हैलट में 200 रोगी पंजीकृत

  • मनीष कुमार

कानपुर नगर। हैलट के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड पीजीआई के इंडोक्रोनोलॉजी विभाग में डायबिटीज के एक नए प्रकार, डायबिटीज 1.5 (लेटेंट ऑटोइम्यून डायबिटीज इन एडल्ट या LADA) से पीड़ित 200 रोगी पंजीकृत हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह डायबिटीज कम उम्र से शुरू होती है, लेकिन इसकी प्रगति धीमी होती है।

डायबिटीज 1.5: लक्षण और कारण
डायबिटीज 1.5 में टाइप-1 और टाइप-2 दोनों के लक्षण मिलते हैं। इसमें अग्नाशय की बीटा कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं, जिससे रोगी को इंसुलिन पर निर्भर रहना पड़ता है। यह बीमारी खराब जीवन शैली या इंसुलिन प्रतिरोध के कारण नहीं होती, बल्कि एंटी-बॉडीज (जैसे GAD एंटीबॉडीज) शरीर की बीटा कोशिकाओं पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देती हैं।

किस उम्र में पता चलता है?
अधिकतर रोगियों में डायबिटीज 1.5 का पता 18 साल या इसके बाद चलता है। प्रारंभिक दौर में इसे अक्सर टाइप-2 डायबिटीज समझ लिया जाता है, लेकिन उपचार टाइप-1 के अनुसार ही किया जाता है। इंडोक्रोनोलॉजी विभाग के प्रभारी डॉ. विशाल कुमार गुप्ता बताते हैं कि यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है और समय पर इलाज मिलने पर रोगी सामान्य जीवन जी सकते हैं।

रोकथाम और सावधानियां
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित खानपान और दवाओं के पालन से डायबिटीज 1.5 के साथ भी स्वस्थ जीवन संभव है। इस रोग में वायरल संक्रमण भी एंटी-बॉडीज के बनने का कारण बन सकता है।

नोट: हैलट हॉस्पिटल में पंजीकृत 18 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के रोगी इस डायबिटीज से प्रभावित हैं और उन्हें इंसुलिन पर रखा गया है।

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