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‘सामाजिक जीवन : जीने की कला’— कानपुर के सामाजिक व्यक्तित्वों ने साझा किए जीवन के प्रेरक सूत्र

  • दिव्या पाण्डेय

कानपुर नगर। सामाजिक चिंतन और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “Think Tank of Kanpur” द्वारा “सामाजिक जीवन : जीने की कला” विषय पर एक विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के अनेक अनुभवी और सक्रिय सामाजिक व्यक्तित्वों ने भाग लिया तथा अपने अनुभवों और विचारों से सामाजिक व्यवहार के सकारात्मक पहलुओं पर प्रकाश डाला।

चर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने यह मत रखा कि सामाजिक जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने के लिए संवाद, सहनशीलता और सकारात्मक सोच अनिवार्य हैं।


विचार-मंथन से निकले मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे —

  1. मृदुभाषी बनें — मधुर वाणी व्यक्ति के व्यक्तित्व का आईना होती है।
  2. दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप अपने लिए चाहते हैं।
  3. अपने कार्य पर केंद्रित रहें — समाज में नकारात्मक सोच रखने वाले लोग हर जगह होते हैं, पर सकारात्मक व्यक्ति को अपने विज़न पर कायम रहना चाहिए।
  4. प्रशंसा करें, आलोचना नहीं। दूसरों के अच्छे कार्यों की सराहना करें और स्वयं की प्रशंसा कम से कम करें।
  5. सामाजिक कार्यों में विज़न रखें, पर दबाव नहीं। खुशी के साथ कार्य करें और किसी अन्य संस्था से तुलना न करें।
  6. विचारों में विविधता को स्वीकारें। हर सामाजिक व्यक्ति अच्छा होता है, बस उसकी सोच अलग होती है।
  7. शब्दों का चयन सोच-समझकर करें। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ यह ध्यान रखें कि किसी की भावना आहत न हो।

विचार गोष्ठी का समापन इस निष्कर्ष के साथ हुआ कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से शुरुआत करे और संवाद, संयम तथा सम्मान की भावना से आगे बढ़े।

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