STORY / ARTICLE
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जब रणभेदी टंकार बजे, घर-घर से हुंकार उठे
जब रणभेदी टंकार बजेघर घर से हुंकार उठेविजयभाल पे खूब सजेऔर जय जय गूंज उठे नई सुबह का सूरज निकलेउत्सव…
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भारत माँ के वीर सपूतों ,शत-शत तुमको नमन है मेरा ………
भारत माँ के वीर सपूतोंशत-शत तुमको नमन है मेराकभी चुका न पाएंगे हमभारतवासी ऋण ये तेरा, ह्रदय विदारक घटनाओं सेद्रवित…
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गाथा है ये संकल्पों की, प्राणों के मात्र विकल्पों की ………..
गाथा है ये संकल्पों की प्राणों के मात्र विकल्पों की बलिदानों की,अभिमानों की आज़ादी के दीवानों की जलती जौहर की…
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भीड़-भाड़ में दुनिया की, जैसे अँखियों को मींचे ………
भीड़-भाड़ में दुनिया कीजैसे अँखियों को मींचेक़दम चल रहे आगे-आगेछूट रही मैं पीछे।कौन डगर और कौन नगर मेंबढ़ी चली जाती…
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मुुश्किल घडियों में गाहे बगाहे, हिम्मत से जुटे रहने का ……..
मुुश्किल घडियों मेंगाहे बगाहेहिम्मत से जुटे रहने काभरोसा दिलाना उसका,पग पगचुनौतियों केघने बादलों के बीच सेसितारों साटिमटिमाना उसका,कभी जीवन केसबसे…
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लिखने को तो लिख सकती हूँ मैं होठों की लाली भी ………
लिखने को तो लिख सकती हूँ मैं होठों की लाली भीलुच्चों के संग से नोंक झोंक कर बज सकती है…
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स्त्री पुरुष की तुलना
समाज की अजीब विडंबना है जो सच है उसे स्वीकार करना मुश्किल हो जाता है ,कल्पना के साय में जीना…
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मानव मन पालता नित नये अरमान, खोलता नित नई सपनों की दुकान
मानव मन पालता नित नये अरमान, खोलता नित नई सपनों की दुकान, आहा! रंग-बिरंगे सपने बिकने को तैयार, सजने को…
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सच सच कहना क्या दिखता है ? हाथों पर तू क्या लिखता है ?
सच सच कहना क्या दिखता है ?हाथों पर तू क्या लिखता है ?जमा हुआ आँखों का पानीक्या बाज़ारों में बिकता…
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आज वर्षा रात भर होती रही, यूँ लगा जैसे निशा रोती रही …….
आज वर्षा रात भर होती रहीयूँ लगा जैसे निशा रोती रहीश्याम मुख घन से छिपाए बावरीभूमि का अस्तर अचल धोती…
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