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RSS की तारीफ पर घिरे दिग्विजय सिंह ने दी सफाई, बोले— विरोध विचारधारा से है, संगठन से नहीं

  • सोनाली सिंह

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए गए अपने बयान पर उठे विवाद के बीच सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध आरएसएस की विचारधारा से है, न कि उसकी संगठनात्मक संरचना से।

एएनआई से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे शुरू से ही आरएसएस की विचारधारा के घोर विरोधी रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस न तो संविधान का सम्मान करता है और न ही देश के कानूनों का पालन करता है। इसके साथ ही उन्होंने संगठन को गैर-पंजीकृत बताते हुए इसकी पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।

हालांकि, सिंह ने यह भी कहा कि वे आरएसएस की संगठनात्मक क्षमता की प्रशंसा करते हैं। उन्होंने कहा कि एक ऐसा संगठन, जो पंजीकृत भी नहीं है, उसका इतना प्रभावशाली बन जाना और प्रधानमंत्री द्वारा उसे दुनिया का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन बताया जाना, उसकी संगठन शक्ति को दर्शाता है।

दरअसल, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर 1990 के दशक की एक पुरानी तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में युवा नरेंद्र मोदी गुजरात में एक कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पास जमीन पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। इस पोस्ट में सिंह ने लिखा था कि कैसे एक जमीनी कार्यकर्ता संगठन के दम पर मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बन सकता है। उन्होंने इसे “संगठन की शक्ति” बताया था।

इस पोस्ट को लेकर आलोचना बढ़ने के बाद दिग्विजय सिंह ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से समझा गया है। उन्होंने साफ कहा कि वे आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर विरोधी हैं और रहेंगे, लेकिन मजबूत संगठनात्मक ढांचे की प्रशंसा करना गलत नहीं है।

साथ ही, कांग्रेस पार्टी के संगठन को लेकर टिप्पणी करते हुए सिंह ने कहा कि उसमें सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने कांग्रेस को एक आंदोलन आधारित पार्टी बताते हुए कहा कि पार्टी आंदोलन तो खड़ा करती है, लेकिन उसे वोटों में बदलने में अक्सर सफल नहीं हो पाती।

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