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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस: तकनीक, शिक्षा और नेतृत्व के नए क्षितिज पर बढ़ती बालिकाएं

बालिका सशक्तीकरण केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक प्रगति और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है: डॉ. आरती द्विवेदी

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में लैंगिक समानता स्थापित करने और बालिकाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने के संकल्प का प्रतीक है। आज की बालिकाएं पारंपरिक शिक्षा और सुरक्षित पालन-पोषण की सीमाओं से आगे बढ़कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में बालिका सशक्तीकरण वैश्विक विकास और तकनीकी प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है।

शिक्षिका, लेखिका एवं समाजसेवी डॉ. आरती द्विवेदी के अनुसार, बदलते समय में बालिकाओं को केवल सरकारी योजनाओं और सामाजिक कल्याण की लाभार्थी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें भविष्य के नेतृत्वकर्ता और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाली शक्ति के रूप में पहचानना आवश्यक है। इसके लिए डिजिटल संसाधनों तक समान पहुंच, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) की शिक्षा में उनकी भागीदारी तथा निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी प्रभावी भूमिका सुनिश्चित करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जब बालिकाओं को शिक्षा, तकनीक, नेतृत्व और संसाधनों के समान अवसर मिलते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव केवल उनके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार, समाज और देश की प्रगति को भी नई दिशा मिलती है। शिक्षित और आत्मनिर्भर बालिकाएं सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनती हैं।

डॉ. द्विवेदी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस समाज को आत्ममंथन करने का अवसर प्रदान करता है कि बालिकाओं के लिए ऐसा वातावरण कैसे तैयार किया जाए, जहां उनकी आकांक्षाओं पर लैंगिक भेदभाव और सामाजिक रूढ़ियों का अंकुश न हो। आवश्यकता केवल उनके सपनों की रक्षा करने की नहीं, बल्कि उन्हें अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए पर्याप्त अवसर, संसाधन और स्वतंत्रता देने की है।

उन्होंने कहा कि वास्तविक सामाजिक विकास तभी संभव है, जब प्रत्येक बालिका भयमुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सके, आत्मविश्वास के साथ अपने निर्णय ले सके और अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सके। बालिकाओं को समान अधिकार और अवसर प्रदान करना एक बेहतर, समावेशी और प्रगतिशील समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

— डॉ. आरती द्विवेदी
शिक्षिका, लेखिका एवं समाजसेवी

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