अजय राय ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में निष्पक्ष जांच की मांग

- समय टुडे डेस्क।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ पीओसीएसओ अधिनियम के तहत दर्ज मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सोमवार को भेजे गए पत्र में राय ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच किसी केंद्रीय या स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने का आग्रह किया। उन्होंने प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए कहा कि मामले की “स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच” जरूरी है, साथ ही “धार्मिक स्वायत्तता की संवैधानिक गरिमा” बनाए रखी जानी चाहिए।
अजय राय ने लिखा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ अदालत के आदेश के अनुपालन में पीओसीएसओ के तहत एफआईआर दर्ज हुई है और अदालत के आदेशों का सम्मान हर नागरिक व सरकार का कर्तव्य है। हालांकि उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े हालात ने समाज में गंभीर सवाल और चिंताएं पैदा कर दी हैं।
पत्र में राय ने यह भी उल्लेख किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूर्व में महाकुंभ मेले में हुई भगदड़ को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। उन्होंने माघ मेले में उन्हें स्नान से रोके जाने और उनके साथ आए भिक्षुओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि मौजूदा आपराधिक कार्रवाई का समय सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है।
राय ने शिकायतकर्ताओं की पृष्ठभूमि की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि मामला पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का परिणाम है तो पारदर्शी जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी, लेकिन यदि इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव या दुर्भावना है तो उसका समय पर समाधान आवश्यक है।
उन्होंने जोर दिया कि आवश्यकता पड़ने पर किसी स्वतंत्र या केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में जांच ही जनता के विश्वास को मजबूत कर सकती है। राय ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और संप्रदायों के अपने मामलों के प्रबंधन के अधिकार की भी चर्चा की।
गौरतलब है कि हाल ही में विशेष न्यायालय के निर्देश पर झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी समेत अन्य के खिलाफ पीओसीएसओ अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की घटनाओं से जुड़े बताए गए हैं, जिनमें नाबालिगों से संबंधित गंभीर यौन अपराध के आरोप शामिल हैं।



