पंजीकरण शुल्क वृद्धि, विदेशी वकीलों की एंट्री और सुरक्षा प्रावधानों के अभाव पर उठाए सवाल
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। अधिवक्ता कल्याण संघर्ष समिति की बैठक में प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2026 को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में अधिवक्ताओं ने विधेयक के कई प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अधिवक्ता हितों के विपरीत बताया।
बैठक को संबोधित करते हुए समिति के संयोजक एवं लॉयर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पं. रविन्द्र शर्मा ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 18 जुलाई 2026 को अधिवक्ता अधिनियम-1961 में प्रस्तावित संशोधन विधेयक को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है और 31 जुलाई 2026 तक अधिवक्ताओं से सुझाव मांगे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन की धारा-24 के तहत अधिवक्ताओं का पंजीकरण शुल्क 750 रुपये से बढ़ाकर 22,500 रुपये किया जा रहा है, जिसमें 18 हजार रुपये राज्य बार काउंसिल तथा 4,500 रुपये बार काउंसिल ऑफ इंडिया को दिए जाएंगे। उनका कहना था कि इतनी अधिक फीस होने से सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली छात्र वकालत के पेशे में आने से वंचित हो जाएंगे।
पं. रविन्द्र शर्मा ने प्रस्तावित धारा-12 का भी विरोध करते हुए कहा कि विदेशी अधिवक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता में भाग लेने की अनुमति देना भारतीय विधिक व्यवस्था में विदेशी हस्तक्षेप की शुरुआत जैसा है।
उन्होंने धारा-24(सी) पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसी अधिवक्ता को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर अपील का अंतिम निर्णय आने से पहले ही उसका नाम अधिवक्ता पंजीकरण से हटाने का प्रावधान न्यायसंगत नहीं है।
बैठक में अधिवक्ताओं ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा, बीमा, पेंशन और चिकित्सा सुविधाओं का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन इनके लागू होने की समय-सीमा और स्पष्ट प्रारूप नहीं दिया गया है। साथ ही अधिवक्ता संरक्षण कानून को प्रस्तावित संशोधन में शामिल न किए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। वक्ताओं ने मांग की कि अधिवक्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने या गिरफ्तारी से पहले संबंधित बार संघ की अनुमति को अनिवार्य बनाया जाए।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि पंजीकरण शुल्क को पूर्ववत नहीं किया गया और अधिवक्ता सुरक्षा, बीमा, पेंशन तथा पारिवारिक चिकित्सा सुविधाओं को स्पष्ट समय-सीमा के साथ लागू करने का प्रावधान नहीं जोड़ा गया, तो देशभर का अधिवक्ता समाज अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2026 का उसी प्रकार विरोध करेगा, जैसा वर्ष 2025 के संशोधन प्रस्ताव का किया गया था।
बैठक में भानु द्विवेदी, देवी प्रसाद मिश्रा, संजीव सोनकर, दिनेश यादव, संजीव कपूर, शिवम गंगवार, भारत पाल, आयुष शुक्ला, अमरदीप शौर्य, सौरभ चैतन्य जायसवाल, साजिद खान, इंद्रेश मिश्रा, आदित्य वीर जोशी सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे।


