बुखार, डायरिया, डिहाइड्रेशन और त्वचा रोगों के मरीज अधिक, डॉक्टरों ने बरतने को कहा विशेष सावधानी
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। शहर में लगातार पड़ रही उमस भरी गर्मी का असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उर्सला, हैलट अस्पताल समेत विभिन्न निजी नर्सिंग होमों में बुखार, जुकाम, डायरिया, उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन और त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
भीषण गर्मी और बढ़ती उमस के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आता है, जबकि लोग गर्मी से राहत पाने के लिए शीतल पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, बाहर मिलने वाले अस्वच्छ खाद्य पदार्थ और पेय कई लोगों के लिए बीमारी का कारण बन रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार इन दिनों अस्पतालों में सिरदर्द, हीट स्ट्रोक, पेट दर्द, डायरिया और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके साथ ही धूप, पसीने और नमी के कारण त्वचा रोगों से पीड़ित मरीज भी बड़ी संख्या में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक पसीना आने से शरीर में नमी बनी रहती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दाद, खाज, खुजली, घमौरियां और अन्य त्वचा संबंधी रोग तेजी से फैल रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार हर तीसरा मरीज किसी न किसी प्रकार की त्वचा संबंधी समस्या से प्रभावित दिखाई दे रहा है।
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि फंगल संक्रमण या त्वचा रोग होने पर प्रभावित व्यक्ति विशेष सावधानी बरतें। अत्यधिक खुजलाने से संक्रमण बढ़ सकता है और शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को नियमित स्नान करने, शरीर को साफ एवं सूखा रखने, स्नान के बाद पाउडर का प्रयोग करने तथा सूती (कॉटन) कपड़े पहनने की सलाह दी है। इसके अलावा नीम की पत्तियां उबालकर या पानी में एंटीसेप्टिक द्रव मिलाकर स्नान करना भी लाभकारी बताया गया है।
चिकित्सकों ने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हरी सब्जियों का सेवन करने, संतुलित आहार लेने तथा बाहर निकलते समय शरीर को धूप से बचाने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी दिनों में मानसून की शुरुआत के साथ वातावरण में नमी और बढ़ेगी, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को अभी से सावधानी बरतने की आवश्यकता है।


