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एफसीआरए बिल के जरिए एनजीओ और अल्पसंख्यक संस्थाओं पर दबाव बनाना चाहती है सरकार : डिंपल यादव

अयोध्या में चढ़ावा चोरी और जमीन खरीद में कथित धांधली पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग, दिल्ली में छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से जवाब देने की मांग

  • नेहा पाठक

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी की मैनपुरी से सांसद श्रीमती डिंपल यादव ने केंद्र सरकार पर एफसीआरए बिल के जरिए एनजीओ और अल्पसंख्यक संस्थाओं पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस कानून के माध्यम से संस्थाओं को नियंत्रित करने और उनकी जमीनों पर कब्जा करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आरएसएस पंजीकृत है या नहीं और उसे संचालित करने के लिए धन कहां से आता है।

श्रीमती डिंपल यादव ने अयोध्या स्थित प्रभु श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर भी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं इस मामले में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ करने की बात कही थी। मुख्यमंत्री अयोध्या के कई दौरे कर चुके हैं, लेकिन जब मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया तो पहले इसे दबाने का प्रयास किया गया और बाद में लीपापोती की गई।

उन्होंने अयोध्या में जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनों की खरीद में कमीशनखोरी और घोटाले के आरोप सामने आए हैं। उनका दावा है कि सस्ते दामों पर खरीदी गई जमीनों को बाद में ट्रस्ट द्वारा अधिक कीमत पर खरीदा गया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए चढ़ावे और दान की राशि में भी कथित तौर पर अनियमितताएं सामने आई हैं तथा दान पेटियों से चढ़ावा गायब होने की बात कही जा रही है।

श्रीमती डिंपल यादव ने कहा कि विपक्ष की मांग है कि अयोध्या में चढ़ावा चोरी और चंदे से जुड़े पूरे मामले पर सरकार विस्तृत स्पष्टीकरण दे। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी सवाल किया कि यदि कई वर्षों से कथित तौर पर चोरी हो रही थी, तो यह मामला उनकी जानकारी में क्यों नहीं आया।

उन्होंने दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। श्रीमती डिंपल यादव ने कहा कि पूरे विपक्ष की मांग है कि गृह मंत्री सदन में उपस्थित होकर दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता तथा अयोध्या में चढ़ावा चोरी के मामले पर जवाब दें।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के मुद्दों पर सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार और जिम्मेदारी है। सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए तथा जिन मामलों को लेकर जनता के बीच सवाल उठ रहे हैं, उन पर पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

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