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ओआरएस जागरूकता अभियान के तहत पोस्टर व स्लोगन प्रतियोगिता आयोजित

बच्चों को ओआरएस के सही उपयोग और दस्त से बचाव की दी गई जानकारी, विजेताओं को किया गया सम्मानित

हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर द्वारा विश्व ओआरएस जागरूकता अभियान के अंतर्गत चिल्ड्रेन केयर हायर सेकेंडरी स्कूल, शारदा नगर में पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में दस्त से बचाव, ओआरएस के सही उपयोग तथा स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

विद्यालय के निदेशक संदीप चंद्र गुप्ता ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों डॉ. जे.के. गुप्ता (अध्यक्ष, एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर), डॉ. शैलेन्द्र गौतम (सचिव, एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर) तथा वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सारस्वत का स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. जे.के. गुप्ता ने बच्चों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित कर दस्त होने पर तुरंत ओआरएस शुरू करने, प्रत्येक घर एवं स्कूल बैग में ओआरएस का पैकेट रखने तथा डिहाइड्रेशन के लक्षणों की पहचान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पेशाब कम आना, मुंह सूखना और अत्यधिक कमजोरी डिहाइड्रेशन के प्रमुख संकेत हैं, जिनमें तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि साबुन और स्वच्छ पानी से हाथ धोना दस्त से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने सही विधि से ओआरएस घोल तैयार कर अपनी जानकारी का प्रदर्शन किया। सही तरीके से ओआरएस घोल तैयार करने वाले बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दस्त से बचाव, ओआरएस एवं जिंक के महत्व तथा स्वच्छता पर आधारित आकर्षक और प्रेरणादायक प्रस्तुतियां दीं।

पोस्टर प्रतियोगिता में नमन साहनी एवं ईशा साहनी (कक्षा-9) ने प्रथम, वर्तिका शर्मा (कक्षा-2) ने द्वितीय तथा वेदांशी सिंह (कक्षा-7) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं स्लोगन प्रतियोगिता में श्रुति कुशवाहा (कक्षा-8) प्रथम और जान्हवी अवस्थी (कक्षा-8) द्वितीय स्थान पर रहीं। प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ स्लोगन रहा— “जब शरीर मांगे राहत की पुकार, याद रखें केवल ORS हर बार।”

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने कहा कि यदि प्रत्येक बच्चा ओआरएस के सही उपयोग का संदेश अपने परिवार तक पहुंचाए तो दस्त से होने वाली गंभीर जटिलताओं और बाल मृत्यु को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से घर में हमेशा ओआरएस का पैकेट उपलब्ध रखने तथा दस्त होने पर चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार ओआरएस और जिंक का उपयोग करने की अपील की।

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