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क्यों सोशल मीडिया बन रहा है बच्चों के लिए ‘साइलेंट किलर’? डॉक्टर से जानें 5 प्रमुख कारण

सोशल मीडिया बच्चों की मेंटल हेल्थ को नेगेटिव असर डाल रहा है और इस लेख में हमने डॉक्टर से वे 5 कारण जानने की कोशिश की है, जिससे बच्चों डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। आप भी पढ़े इस लेख में।

आज के डिजिटल दौर में बच्चों के पास मोबाइल या लैपटॉप होना जरूरत बन चुका है। स्कूल की ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर स्टडी मेटीरियल सब कुछ डिजिटल हो चुका है। जब बच्चे सारा दिन लैपटॉप और मोबाइल चलाते हैं, तो सोशल मीडिया से अछूते रहना बुहत ही मु्श्किल है। खासतौर से रील्स के जमाने में बच्चे अपना अकाउंट सोशल मीडिया पर बनाते हैं और फिर पोस्टिंग से शुरू होकर लाइक्स और शेयर का अंतहीन सिलसिला बन जाता है। बच्चे सारा दिन ऑनलाइन दोस्तों के लाइक्स और शेयर में इतना दिमाग लगाते हैं कि इससे उनके मेंटल हेल्थ पर भी नेगेटिव असर पड़ने लगता है। अकेलापन और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का रिस्क लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों के सोशल मीडिया के डिप्रेशन को समझना बहुत जरूरी है। इस लेख में हमने दिल्ली के PSRI अस्पताल की साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर अर्पिता कोहलीसे बात की। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया से होने वाले डिप्रेशन के मनोवैज्ञानिक कारणों को समझना बहुत महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले डिप्रेशन के 5 कारण
साइकोलॉजिस्ट अर्पिता कोहली कहती हैं, “सोशल मीडिया लोगों से जुड़ने का अच्छा मीडियम है, लेकिन बच्चे इस कदर सोशल मीडिया में खो जाते हैं कि कई बार उन्हें पता ही नहीं चलता कि वे डिप्रेशन का शिकार हो गए हैं, इसलिए इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है।”

FOMO के शिकार होना
अर्पिता कहती हैं कि FOMO का मतलब है कि फियर ऑफ मिसिंग आउट यानी कि जब बच्चे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों या अन्य लोगों को दुनियाभर में ट्रैवल करते, नई चीजें खरीदने या फिर सेलिब्रेशन की फोटोज देखते हैं, तो उन्हें महसूस होता है कि दूसरों की जिंदगी में ज्यादा खुशियां है और उनके जीवन में सिर्फ दुख ही है। ऐसे इमोशन्स बच्चों में बैचेनी और एंग्जाइटी बढ़ा देते हैं। अगर लगातार बच्चा इसी इमोशन में रहता है, तो वह धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।

दूसरों से तुलना करना
जब बच्चा सोशल मीडिया पर दूसरों की परफेक्ट फोटो देखता है, तो अपने जीवन में असुरक्षा की भावना आने लगती है। बच्चे को यह समझ नहीं आता कि जो भी फोटोज सोशल मीडिया पर लगाई जाती हैं, वे एडिटिड होती है। उसका असल जीवन से कोई ज्यादा लेना-देना नहीं होता, लेकिन बच्चों के मन में ये सब देखकर जलन की भावना आने लगती है। उन्हें लगता है कि वे परफेक्ट और टैलेंटेड नहीं है, जिससे उनमें सेल्फ कॉन्फिडेंस कम होने लगता है। NCBI की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया के लगातार इस्तेमाल से बच्चों की सेल्फ एस्टीम पर असर पड़ रहा है और साथ ही डिप्रेशन और एंग्जाइटी के शिकार हो रहे हैं।

लाइक्स और कमेंट्स बहुत ज्यादा होना
बच्चे जब सोशल मीडिया पर फोटोज पोस्ट करते हैं, तो वे लाइक्स और शेयर को लेकर बहुत टेंशन में रहते हैं। जब बच्चों को पोस्ट पर ज्यादा लाइक या शेयर दिखते हैं, तो ये सब चीजें उनके दिमाग में डोपामिन-ड्रिवन रिवॉर्ड सिस्टम बना देती हैं। अगर पोस्ट पर ज्यादा लाइक्स या शेयर नहीं आते, तो बच्चों में गुस्सा आने लगता है। कई बार लगातार पोस्ट पर कम रिस्पांस मिलने से बच्चों का नेगेटिव बिहेवियर देखने को मिलता है। ये नेगेटिव बिहेव आगे चलकर मेंटल हेल्थ को बहुत ज्यादा इम्पैक्ट करता है।

अकेले रहने की आदत
जब बच्चा सारा दिन अकेले बैठकर सोशल मीडिया पर लगा रहता है, तो वह असल जिंदगी के दोस्तों से कटने लगता है। स्कूल के दोस्तों के साथ खेलना-कूदना या फिर बातचीत होना कम हो जाती है। कई मामलों में तो बच्चे अपने पैरेंट्स से भी बात करना पसंद नहीं करते। इसका असर यह होता है कि उनमें धीरे-धीरे अकेलेपन की फीलिंग आने लगती है और यह आगे चलकर डिप्रेशन का रूप ले लेता है।

फोकस की कमी
सोशल मीडिया पर सारा दिन रहने से बच्चों में फोकस की कमी बहुत ज्यादा देखने को मिलती है। 10-20 सैकेंड की रील्स देखते रहने से बच्चों में अटेंशन की कमी होने लगती है। सारा दिन फोन पर नोटिफिकेशन देखते रहने से मन एक जगह फोकस नहीं कर पाता, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या होने लगती है। अगर पैरेंट्स इस पर ध्यान नहीं दे पाते, तो बच्चे की पढ़ाई पर असर पड़ने लगता है और कई बार खुद को असफल मानकर वह डिप्रेशन का शिकार हो जाता है।

निष्कर्ष
अर्पिता कहती हैं कि सोशल मीडिया देखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन लगातार दिन में कई घंटे सोशल मीडिया पर रहना उसके मेंटल हेल्थ के लिए सही नहीं है। अगर पैरेंट्स अपने बच्चे में ऐसा कुछ बिहेव देखते हैं, तो उन्हें बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करना चाहिए और साथ ही उसे मनपसंद हॉबीज और एक्टिविटीज में डालना चाहिए ताकि वह असल जिंदगी को महसूस कर सके।

सोशल मीडिया मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?
सोशल मीडिया पर लगातार रहने से मेंटल हेल्थ पर असर पड़ता है। इससे कई लोगों में स्ट्रेस, डिप्रेशन और डाइट से जुड़ी कई समस्याएं देखने को मिली है।
मानसिक बीमारी के 5 लक्षण क्या हैं?
मानसिक बीमारी में उदासी, नींद पूरी न होना, सोशल लाइफ से दूर होना, फोकस न होना और फैसले लेने में मुश्किल होना शामिल है।
1 मिनट में तनाव कैसे दूर करें?
एक मिनट में स्ट्रेस कम कम करने के लिए गहरी सांस लें और फिर धीरे-धीरे छोड़ें। कुछ लोग एक मिनट तक आंखे बंद करके शांत बैठते है।

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