राहुल गांधी के खिलाफ FIR पर कांग्रेस का विरोध, शैलजा बोलीं- ‘शुद्धिकरण’ करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
- समय टुडे डेस्क।
देहरादून/हल्द्वानी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी में हुई जनसभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कथित शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कुमारी शैलजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष की जनसभा के बाद कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, जबकि इस मामले के खिलाफ आवाज उठाने पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी कार्यक्रम स्थल पर कथित तौर पर जातिगत भावनाओं से जुड़ा शुद्धिकरण किया गया, तो उसके आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। शैलजा ने इसे दलित सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
‘राहुल गांधी की आवाज दबाने की कोशिश’
शैलजा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी द्वारा कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान के खिलाफ आवाज उठाने पर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया, जबकि अनुष्ठान करने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी।
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पीड़ित पक्ष की आवाज उठा रहे थे और संविधान में दिए गए अधिकारों के तहत अपनी बात रख रहे थे।
गोदियाल ने दावा किया कि कथित शुद्धिकरण को लेकर पीड़ित पक्ष की ओर से भी पुलिस को शिकायत दी गई थी, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी के खिलाफ किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
हल्द्वानी नगर कोतवाली पुलिस ने वाल्मीकि समुदाय के सदस्य अमित कुमार की शिकायत के आधार पर 30 अगस्त को राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।
पुलिस ने मामले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(यू) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
8 अगस्त की कांग्रेस रैली के बाद शुरू हुआ विवाद
यह विवाद 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली के बाद शुरू हुआ था। रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संबोधित किया था। इसके बाद कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा कार्यक्रम स्थल पर ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किए जाने को लेकर कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई।
राहुल गांधी ने इस कथित अनुष्ठान को ‘अस्पृश्यता का दूसरा नाम’ बताते हुए इसमें शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस तरह की कार्रवाई संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कथित शुद्धिकरण को अपनी दलित पहचान से जोड़कर सवाल उठाया था कि लोकतंत्र में इस तरह की प्रथाओं को स्वीकार किया जा सकता है या नहीं।
वहीं, भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घटना में कोई जातिगत पहलू नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर हिंदू समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
इस मामले को लेकर अब कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने विवाद को और तूल दे दिया है।


