कानपुर पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त कार्रवाई, 15 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा
- अजय कुमार
कानपुर नगर। थाना शिवराजपुर पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल, कमिश्नरेट कानपुर नगर की संयुक्त टीम ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए छह साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह लंबे समय से देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय था और हजारों लोगों को अपना शिकार बना चुका है।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य स्वयं को पुलिस, सीबीआई तथा अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फर्जी मामलों में गिरफ्तारी का भय दिखाते थे। इसके बाद पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट जैसी झूठी अवधारणाओं के माध्यम से डराकर उनसे बड़ी रकम वसूल की जाती थी। ठगी से प्राप्त धनराशि को पी2पी ट्रेडिंग के जरिए यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किया जाता था, जिससे धन के स्रोत को छिपाया जा सके।
एनसीआरपी और प्रतिबिंब पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार यह गिरोह पिछले लगभग तीन वर्षों से सक्रिय था। गिरोह पर देशभर में लगभग 2,500 लोगों से 15 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम के लेन-देन के लिए 450 से अधिक फर्जी और किराए पर लिए गए बैंक खातों का उपयोग किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अशरफ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन कुमार तथा कमल के रूप में हुई है। इनके कब्जे से 5 मोबाइल फोन, 1 टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, 2 चेकबुक और 12 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार गिरोह के विरुद्ध उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में भी शिकायतें दर्ज हैं। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(2), 318(4) तथा आईटी एक्ट की धारा 66D के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
साइबर अपराध के इस बड़े नेटवर्क का खुलासा करने वाली पुलिस टीम के उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए उसे 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा पुलिस, सीबीआई या अन्य एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन पर धनराशि मांगने अथवा गिरफ्तारी का भय दिखाने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।


