पर्यावरण असंतुलन मानवता के लिए खतरा: डॉ. शेखर पाठक

राजेंद्र चौधरी के आवास पर आयोजित चर्चा गोष्ठी में उठे हिमालय और पर्यावरण के मुद्दे
- अखिलेश कुमार
लखनऊ। प्रख्यात पर्यावरणविद, लेखक और इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक ने कहा कि पर्यावरण से छेड़छाड़ और प्राकृतिक असंतुलन मानवता के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिमालय का प्रश्न केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव नेपाल, चीन और तिब्बत सहित पूरे क्षेत्र पर पड़ता है।
डॉ. पाठक हाल ही में लखनऊ प्रवास पर थे, जहां समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी ने उनके सम्मान में एक चर्चा गोष्ठी आयोजित की। गोष्ठी में उन्होंने हिमालय, पर्यावरण, इतिहास और समकालीन चुनौतियों पर विस्तार से विचार रखे।
उन्होंने कहा कि गांधी और डॉ. राममनोहर लोहिया भी प्रकृति के साथ खिलवाड़ के दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित थे। डॉ. लोहिया के नेतृत्व में समाजवादियों ने ‘हिमालय बचाओ आंदोलन’ चलाया था और तिब्बत को लेकर विशेष नीति की वकालत की थी। उन्होंने वैज्ञानिक माधव गाडगिल के हवाले से कहा कि अमेज़न में जंगलों की कटाई का असर भारत के मानसून पर भी पड़ रहा है और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के संकेत मिल रहे हैं।
डॉ. पाठक ने कहा कि हिमालय का पर्यावरण राजनीति के साथ-साथ अर्थनीति का भी विषय है। उन्होंने लद्दाख और तिब्बत के खनिज भंडारों, क्षेत्रीय भाषाई विविधता तथा स्थानीय समुदायों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार जनसहभागिता के बिना पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं है।
राजेंद्र चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव पर्यावरण के प्रति हमेशा सजग रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में अखिलेश यादव ने साइकिल ट्रैक, लोहिया पार्क तथा एशिया के विशाल जैव विविधता संपन्न जनेश्वर मिश्र पार्क का निर्माण कराया, जो पर्यावरणीय सोच को दर्शाता है।
डॉ. पाठक ने चारधाम यात्रा मार्ग निर्माण के दौरान पर्यावरणीय संतुलन की अनदेखी पर चिंता जताई और केदारनाथ क्षेत्र में भूस्खलन व बाढ़ की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बड़े विकास कार्यों में पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता देना जरूरी है।
वर्तमान संदर्भ में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जहां-जहां एआई यूनिट स्थापित होंगी, वहां भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में जल संकट पहले से मौजूद है।
गोष्ठी के समापन पर राजेंद्र चौधरी ने डॉ. शेखर पाठक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस विषय पर आगे भी ऐसे विमर्श आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अखिलेश यादव को उत्तराखंड से विशेष लगाव है और प्राकृतिक आपदाओं के समय उन्होंने वहां राहत व सहायता कार्य भी भेजे थे।
कार्यक्रम में प्रो. रमेश दीक्षित, वरिष्ठ पत्रकार नवीन जोशी, वंदना मिश्रा, प्रो. बी. पांडेय, अंबरीष कुमार, शीतल पी सिंह, प्रो. मनोज पांडेय, अंशु केडिया, अतहर हुसैन, अनुराग मिश्रा, मधुकर त्रिवेदी, मणिंद्र मिश्र, सोनू कनौजिया, आशीष यादव ‘सोनू’, नवीन धवन ‘बंटी’, विनोद यादव, अतुल शुक्ला सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



