प्रेग्नेंसी प्लानिंग की चेकलिस्ट में ओरल हेल्थ को क्यों रखें सबसे ऊपर? डॉक्टर से जानें 5 अहम कारण

अक्सर महिलाएं प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले हिमोग्लोबिन, थायरॉयड, न्यूट्रिशन और पीरियड्स से जुड़े टेस्ट तो करवा लेती हैं, लेकिन दांतों और मसूड़ों की जांच को नजरअंदाज कर देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए ओरल हेल्थ का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना बाकी शारीरिक जांच।
गुरुग्राम स्थित क्लाउडनाइन हॉस्पिटल की ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. चेतना जैन बताती हैं कि खराब ओरल हाइजीन का असर सीधे प्रेग्नेंसी पर पड़ सकता है। मुंह की बीमारियां शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती हैं और गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं बढ़ा सकती हैं।
ओरल हेल्थ और प्रेग्नेंसी का क्या है कनेक्शन?
डॉ. चेतना के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से मसूड़े और दांत अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। अगर पहले से मसूड़ों में सूजन, खून आना या पेरियोडोंटल (मसूड़ों की गंभीर) बीमारी हो, तो गर्भावस्था में समस्या बढ़ सकती है।
मसूड़ों का संक्रमण ब्लडस्ट्रीम के जरिए शरीर में फैलकर भ्रूण पर भी असर डाल सकता है। यही कारण है कि प्रेग्नेंसी से पहले ओरल हेल्थ की जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।
खराब ओरल हेल्थ से होने वाले 5 बड़े जोखिम
- समय से पहले डिलीवरी का खतरा
मसूड़ों के संक्रमण से शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जिससे प्री-टर्म डिलीवरी का जोखिम बढ़ जाता है। - बच्चे की ग्रोथ पर असर
यदि संक्रमण का इलाज समय पर न किया जाए तो भ्रूण के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। - मिसकैरेज का बढ़ा जोखिम
कुछ रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार, गंभीर डेंटल समस्याओं वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा अधिक पाया गया है। मसूड़ों का संक्रमण गर्भाशय को प्रभावित कर सकता है। - दवाइयों की सीमित उपलब्धता
यदि दांतों की समस्या पहले से हो और इलाज न कराया गया हो, तो गर्भावस्था के दौरान दवाइयों के विकल्प सीमित हो जाते हैं। - न्यूट्रिशन की कमी का खतरा
दांतों में दर्द या सूजन होने पर ठीक से चबाना मुश्किल होता है, जिससे मां को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता — जबकि प्रेग्नेंसी में संतुलित आहार बेहद जरूरी है।

प्रेग्नेंसी से पहले इलाज क्यों बेहतर?
डॉ. चेतना बताती हैं कि प्रेग्नेंसी से पहले डेंटल एक्स-रे और अन्य प्रक्रियाएं सुरक्षित रूप से कराई जा सकती हैं। इस समय हार्मोनल बदलाव कम होते हैं, इसलिए मसूड़ों का इलाज आसान रहता है।
गर्भावस्था के दौरान सूजन और संवेदनशीलता अधिक होने से डेंटल ट्रीटमेंट असहज हो सकता है। इसलिए पहले से इलाज कराना ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक है।
प्रेग्नेंसी से पहले ओरल हाइजीन कैसे रखें बेहतर?
- डेंटिस्ट से पूरा ओरल चेकअप कराएं
- मसूड़ों से खून, दर्द या बदबू को नजरअंदाज न करें
- दिन में कम से कम दो बार ब्रश करें
- रोज फ्लॉसिंग करें
- मीठा और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं
- डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम और विटामिन D लें
ओरल हाइजीन का मतलब क्या है?
ओरल हाइजीन का अर्थ है दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखना। इसके लिए नियमित ब्रशिंग, फ्लॉसिंग और समय-समय पर डेंटल चेकअप जरूरी है।
2-2-2 नियम क्या है?
- साल में दो बार डेंटिस्ट के पास जाएं
- दिन में दो बार ब्रश करें
- हर बार कम से कम दो मिनट तक ब्रश करें
अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार, दिन में दो बार ब्रश करना दांतों की सड़न से बचाने में मदद करता है।
निष्कर्ष
हेल्दी प्रेग्नेंसी सिर्फ संतुलित आहार और नियमित जांच से ही नहीं, बल्कि बेहतर ओरल हेल्थ से भी जुड़ी है। मुंह की छोटी-सी समस्या भी गर्भावस्था में बड़ी जटिलता का कारण बन सकती है।
इसलिए अगर आप प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो अपनी चेकलिस्ट में ओरल हेल्थ को जरूर शामिल करें — क्योंकि स्वस्थ मां ही स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है।



