HomeNEWSमेरठ में महिला दरोगा का आपत्तिजनक वीडियो वायरल, SSP ने किया निलंबित

मेरठ में महिला दरोगा का आपत्तिजनक वीडियो वायरल, SSP ने किया निलंबित

सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित होने के बाद पुलिस विभाग में कार्रवाई, साइबर सेल को सौंपी गई जांच

  • दीपक कुमार

मेरठ। सोशल मीडिया पर एसएसपी कार्यालय में तैनात एक महिला दरोगा का आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के मामले में पुलिस विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने के बाद मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय ने महिला दरोगा को तत्काल निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की जांच साइबर सेल को सौंप दी गई है।

बताया जा रहा है कि रविवार को सोशल मीडिया पर महिला दरोगा का एक वीडियो प्रसारित हुआ, जिसमें वह छोटे कपड़ों में नजर आ रही हैं और कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो को एक यूट्यूब चैनल द्वारा समाचार के रूप में भी प्रसारित किया गया। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मामले में एक यूट्यूब चैनल ने वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी राजीव कृष्ण से कार्रवाई की मांग की। वीडियो के साथ महिला पुलिसकर्मी के सोशल मीडिया अकाउंट से संबंधित दावे भी किए गए।

वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। जांच में महिला की पहचान मेरठ में तैनात एक महिला दरोगा के रूप में होने की बात सामने आई। इसके बाद एसएसपी अविनाश पांडेय ने तत्काल निलंबन की कार्रवाई की।

पुलिस के अनुसार महिला दरोगा के इंस्टाग्राम अकाउंट और यूट्यूब चैनल की भी जांच की जा रही है। वायरल वीडियो, उससे संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट और पूरे प्रकरण की तकनीकी जांच साइबर सेल द्वारा की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रथम दृष्टया महिला दरोगा का सोशल मीडिया पर इस तरह का आचरण विभाग की सोशल मीडिया नीति के उल्लंघन के दायरे में आता है। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया कि वर्दीधारी या पुलिस पद पर तैनात कर्मचारियों से विभाग की गरिमा और निर्धारित आचरण नियमों का पालन अपेक्षित है।

अधिकारियों ने बताया कि साइबर सेल की जांच में वीडियो की वास्तविकता, उसके स्रोत, सोशल मीडिया पर प्रसारण और संबंधित अकाउंट्स की भूमिका सहित अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नोट: वायरल वीडियो और उससे जुड़े सोशल मीडिया दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए वीडियो की सामग्री या उसमें दिखाई दे रही महिला की पहचान से संबंधित दावों को जांच पूरी होने तक अंतिम तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

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