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विधि छात्रों ने किया जिला कारागार सिद्धार्थनगर का शैक्षणिक भ्रमण, न्याय व्यवस्था और बंदी पुनर्वास की मिली जानकारी

31 विधि विद्यार्थियों ने कारागार प्रशासन, विधिक सहायता और सुधारात्मक कार्यक्रमों को नजदीक से समझा

  • अमित तिवारी

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों तथा सचिव शैलेंद्र नाथ के मार्गदर्शन में आयोजित व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार को सिद्धार्थ लॉ कॉलेज के 31 विधि विद्यार्थियों ने जिला कारागार सिद्धार्थनगर का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को न्यायिक व्यवस्था, कारागार प्रशासन, बंदियों के अधिकारों तथा सुधारात्मक गतिविधियों के संबंध में व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।

भ्रमण के दौरान जिला कारागार प्रशासन ने विद्यार्थियों को कारागार की कार्यप्रणाली से विस्तारपूर्वक अवगत कराया। कार्यक्रम की शुरुआत कारागार के इतिहास, उद्देश्यों तथा आधुनिक समय में जेलों की बदलती भूमिका की जानकारी के साथ हुई। जेल अधीक्षक सचिन वर्मा ने बताया कि वर्तमान समय में कारागार केवल दंड देने का केंद्र नहीं, बल्कि बंदियों के सुधार, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापना का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं।

विद्यार्थियों ने कारागार परिसर के विभिन्न अनुभागों का निरीक्षण किया, जिनमें प्रवेश व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली, बैरकें, चिकित्सालय, रसोईघर, पुस्तकालय, मुलाकात कक्ष, प्रशिक्षण केंद्र तथा अन्य व्यवस्थाएं शामिल रहीं। इस दौरान उन्हें बताया गया कि बंदियों को संविधान एवं कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं तथा उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और मानसिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

भ्रमण के दौरान छात्रों ने बंदियों के लिए संचालित विभिन्न सुधारात्मक एवं पुनर्वास कार्यक्रमों का भी अवलोकन किया। उन्हें बताया गया कि कारागार में शिक्षा, योग, ध्यान, खेलकूद, पुस्तक अध्ययन, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाता है, ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें।

इस अवसर पर चीफ अश्वनी मिश्रा ने विद्यार्थियों को विधिक सहायता प्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नियमित रूप से कार्य करता है, जिससे सभी को न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सके। विद्यार्थियों ने विधिक सहायता की प्रक्रिया और उसके व्यावहारिक पक्षों से जुड़े प्रश्न भी पूछे, जिनका अधिकारियों ने विस्तार से उत्तर दिया।

छात्रों को न्यायिक प्रक्रिया, विचाराधीन एवं सजायाफ्ता बंदियों के बीच अंतर, जेल नियमावली, मानवाधिकार संरक्षण तथा सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की अवधारणा के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई। अधिकारियों ने कहा कि विधि के विद्यार्थी भविष्य में न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग बनेंगे, इसलिए ऐसे शैक्षणिक भ्रमण उनके लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने कारागार प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न नवाचारों और व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। उन्होंने विशेष रूप से बंदियों के सुधार एवं पुनर्वास से जुड़े कार्यक्रमों में रुचि दिखाई और उनके सामाजिक महत्व को समझा।

कारागार प्रशासन ने बताया कि कारागार में अनुशासन, सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए कार्य किया जाता है। बंदियों को सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने तथा उनमें नैतिक एवं सामाजिक मूल्यों के विकास के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन और प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाते हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य बंदियों में आत्मविश्वास विकसित करना और उन्हें समाजोपयोगी नागरिक के रूप में तैयार करना है।

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