समय पर ORS और Zinc देकर हर बच्चे की बचाई जा सकती है जान: बाल रोग विशेषज्ञ
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। विश्व ओआरएस सप्ताह के अवसर पर एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर द्वारा जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि दस्त से नहीं, बल्कि डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) से बच्चों की मृत्यु होती है और समय पर ओआरएस (ORS) तथा जिंक देने से अधिकांश बच्चों की जान बचाई जा सकती है।
प्रेस वार्ता में एकेडमी के अध्यक्ष डॉ. जे. के. गुप्ता, सचिव डॉ. शैलेन्द्र गौतम, डॉ. अरुण आर्या और डॉ. अमितेश यादव उपस्थित रहे।
डॉ. जे. के. गुप्ता ने बताया कि पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में दस्त मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 4.62 लाख लोगों की मृत्यु दस्त से होती है, जबकि उत्तर प्रदेश में हर वर्ष करीब 28 हजार पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की जान दस्त के कारण चली जाती है। उन्होंने कहा कि ओआरएस और जिंक दस्त का सबसे सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपचार है, जिससे बच्चों को अनावश्यक रूप से अस्पताल में भर्ती होने से भी बचाया जा सकता है।
डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य समुदाय ने वर्ष 2030 तक दस्त से पीड़ित कम से कम 70 प्रतिशत बच्चों तक ओआरएस पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार भारत में दस्त से पीड़ित 60.6 प्रतिशत बच्चों को ओआरएस दिया जाता है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा केवल 50.7 प्रतिशत है। इसका अर्थ है कि प्रदेश में लगभग आधे बच्चों को दस्त होने पर भी समय पर ओआरएस नहीं मिल पाता।
डॉ. अरुण आर्या ने कहा कि कई अभिभावक बिना चिकित्सकीय सलाह के बच्चों को एंटीबायोटिक या दस्त रोकने वाली दवाएं देना शुरू कर देते हैं, जबकि अधिकांश मामलों में इसकी आवश्यकता नहीं होती। इससे दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के साथ बच्चों को अनावश्यक दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ता है।
डॉ. अमितेश यादव ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चे को दस्त होने पर घबराने की बजाय तुरंत ओआरएस देना शुरू करें, चिकित्सक की सलाह के अनुसार 14 दिनों तक जिंक की दवा दें, स्तनपान और सामान्य भोजन जारी रखें तथा निर्जलीकरण के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल अस्पताल पहुंचें।
उन्होंने बताया कि 25 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक पूरे कानपुर में विश्व ओआरएस सप्ताह के तहत व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। अभियान के अंतर्गत अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर ओआरएस जागरूकता कार्यक्रम, ओआरएस कॉर्नर, पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिताएं, जनसंपर्क अभियान, चिकित्सकों और केमिस्टों के साथ बैठकें तथा विभिन्न जनहित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।


