सुशासन, महिला सशक्तिकरण और लोककल्याण की प्रतीक थीं अहिल्याबाई होल्कर : सपा
- अखिलेश कुमार अग्रहरि
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय, लखनऊ में वीरांगना लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती सादगीपूर्ण ढंग से मनाई गई। इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी एवं समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने लोकमाता के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि 18वीं शताब्दी में उनके द्वारा स्थापित सुशासन, धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और महिला सशक्तिकरण के कार्य भारतीय इतिहास में सदैव अमर रहेंगे। उन्होंने कहा कि अपनी न्यायप्रियता, दूरदर्शिता और लोककल्याणकारी निर्णयों के माध्यम से अहिल्याबाई होल्कर ने आदर्श शासन-प्रशासन की मिसाल पेश की थी।
अखिलेश यादव ने कहा कि मराठा साम्राज्य के मालवा क्षेत्र की महान महारानी अहिल्याबाई होल्कर को लोकमाता के रूप में सम्मानित किया जाता है। वे भगवान शिव की परम भक्त थीं और उन्होंने देशभर में अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई होल्कर ने अपने शासनकाल में काशी विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट तथा गया स्थित विष्णु मंदिर सहित अनेक धार्मिक स्थलों का निर्माण एवं पुनर्निर्माण कराया। केदारनाथ से लेकर रामेश्वरम तक देशभर में 100 से अधिक मंदिरों के जीर्णोद्धार का श्रेय भी उन्हें जाता है। शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम में पूर्व सांसद अरविंद कुमार सिंह, समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. बी. पांडेय, अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया पाल, पूर्व विधायक अंबरीश पुष्कर, सपा उपाध्यक्ष सीएल वर्मा, जिलाध्यक्ष जयसिंह जयंत, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिक्षक सभा मणेन्द्र मिश्रा, ऊषा सेन, मटरू राम सरोज, राधेश्याम यादव, विजय सिंह, दिनेश सिंह, रामसागर यादव, जेपी सिंह सेंगर, त्रिवेणी पाल, इंजीनियर संदीप यादव, शैलेन्द्र यादव, अर्चना रावत, वीरेन्द्र यादव, आयुष यादव, पवन यादव, जितेन्द्र यादव, श्यामेन्द्र कुमार मिश्र, जानकी पाल सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं समर्थक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, संघर्ष, प्रशासनिक दक्षता और समाज सुधार के कार्यों को याद करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।


