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‘समाज में एकता बनाए रखना संघ की प्राथमिकता’, यूजीसी नियमों पर आरएसएस की प्रतिक्रिया

  • समय टुडे डेस्क।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समानता संबंधी नियमों पर रोक लगाए जाने के बाद जारी बहस के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। संघ के वरिष्ठ नेता और अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने मंगलवार को कहा कि आरएसएस समाज में एकता बनाए रखने में विश्वास रखता है और इसके लिए हर संभव प्रयास करता रहेगा।

स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाने वालों की आलोचना का जवाब देते हुए अंबेकर ने कहा कि संघ को 100 वर्षों के बाद यह साबित करने की आवश्यकता नहीं है कि उसने देश की संप्रभुता और एकता के लिए क्या योगदान दिया है। उन्होंने कहा, “संघ की स्थापना ही इसी उद्देश्य से हुई थी। संघ ने जो भी कार्य किए हैं, वे देशहित में किए हैं।”

गौरतलब है कि पिछले महीने केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए यूजीसी नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच और समानता को प्रोत्साहित करने के लिए ‘समानता समितियों’ के गठन को अनिवार्य किया गया था। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर विरोध भी देखने को मिला।

‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा’ संबंधी यूजीसी विनियम, 2026 के अनुसार, इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांगजन और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगाते हुए कहा है कि यह ढांचा प्रथम दृष्टया अस्पष्ट है और इसके व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं, जिससे समाज में विभाजन और ‘खतरनाक परिणाम’ उत्पन्न हो सकते हैं।

इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील अंबेकर ने कहा, “अदालत ने दिशा-निर्देशों पर रोक लगाई है। इस पर अलग-अलग लोगों ने अपने विचार रखे हैं और मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। संघ का मानना है कि समाज में एकता बनी रहनी चाहिए और हम इसे बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएंगे।”

ठाणे में ‘शहर को हरा रंग देने’ से जुड़े हालिया विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में—जो एआईएमआईएम की एक पार्षद के बयान से जुड़ा था—अंबेकर ने कहा कि देश का रंग हजारों वर्षों से केसरिया रहा है।

वहीं, हाल ही में संपन्न नगर निगम चुनावों में भाषा को लेकर उठे मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आरएसएस का स्पष्ट मत है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा रही है कि सभी भाषाएं साथ-साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से फलती-फूलती रही हैं।

अंबेकर ने कहा, “देश के लोगों ने अपनी अनेक भाषाओं को संरक्षित रखा है और वे आज भी जीवंत हैं। यही हमारा इतिहास है। यदि लोग भाषा के इस इतिहास को भूल जाएंगे, तो समस्याएं पैदा होंगी।”

गौरतलब है कि शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने नगर निगम चुनावों में मराठी भाषा और ‘अस्मिता’ को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था।

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