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संचार साथी ऐप पर सियासी घमासान: कांग्रेस ने लगाया जासूसी का आरोप, BJP ने कहा—‘मुद्दों को बेवजह न उछालें’

  • सोनाली सिंह

नई दिल्ली। दूरसंचार विभाग द्वारा मोबाइल फोनों में संचार साथी ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के फैसले पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे “जासूसी ऐप” करार देते हुए सरकार पर नागरिकों की निजता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, वहीं सरकार की ओर से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष की आलोचना को निराधार बताया।

प्रियंका गांधी का आरोप—“निजता पर हमला, देश को तानाशाही की ओर ले जाया जा रहा”

प्रियंका गांधी ने कहा कि ऐप नागरिकों की निजी चैट और गतिविधियों की जासूसी का माध्यम बन सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से बच रही है और लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर किया जा रहा है।
उनके अनुसार, “धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और हर नागरिक की फोन गतिविधि देखने के बीच बहुत बारीक रेखा है। इस तरह से काम नहीं होना चाहिए।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने भी ऐप को “निगरानी का मनहूस उपकरण” बताते हुए इसका विरोध किया। उन्होंने जॉर्ज ऑरवेल की 1984 का उदाहरण देकर कहा कि “बिग ब्रदर हमें नहीं देख सकता” और इस अनिवार्यता को असंवैधानिक बताया।

सरकार की सफाई—“हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार, संसद को बाधित न करें”

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विवाद पर कहा कि विपक्ष अनावश्यक मुद्दे उठाकर संसद की कार्यवाही बाधित न करे।
उन्होंने कहा, “हर मुद्दे की अपनी जगह अहमियत है, लेकिन इन्हें संसद ठप करने के हथियार की तरह इस्तेमाल करना सही नहीं है। सरकार विपक्ष के साथ संवाद के लिए तैयार है।”

सरकार का पक्ष—ऐप का उद्देश्य सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम

दूरसंचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐप का उद्देश्य केवल सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण है। मंत्रालय के मुताबिक, 28 नवंबर को जारी निर्देश नागरिकों को नकली हैंडसेट से बचाने, साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग को सरल बनाने और संचार साथी पहल को अधिक प्रभावी बनाने के लिए हैं।

निर्माताओं को 90 दिनों के भीतर इन निर्देशों को लागू करना होगा, जबकि 120 दिनों में अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी।
ऐप के माध्यम से उपयोगकर्ता:

  • IMEI नंबर से मोबाइल की प्रामाणिकता जांच सकते हैं
  • चोरी/खोए हुए फोन की रिपोर्ट कर सकते हैं
  • अपने नाम पर चल रहे मोबाइल कनेक्शन देख सकते हैं
  • संदिग्ध कॉल/मैसेज की रिपोर्ट कर सकते हैं
  • बैंकों और वित्तीय संस्थानों के भरोसेमंद संपर्क विवरण हासिल कर सकते हैं

सरकार के अनुसार, यह कदम नकली या छेड़छाड़ किए गए IMEI नंबरों से उत्पन्न सुरक्षा खतरे को रोकने के लिए अनिवार्य किया गया है।

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