भाजपा सरकार ने प्रदेश में नए माफिया पैदा किए — अखिलेश यादव

- अभिषेक कुमार
कानपुर नगर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर प्रदेश में नए-नए माफिया पैदा करने का आरोप लगाया है। शुक्रवार को कानपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने “एनकाउंटर माफिया, कप सिरप माफिया, नीट माफिया और स्कैम माफिया” जैसे नए संस्करण तैयार किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में निवेश नहीं आ पा रहा है।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा सरकार नौ साल में बिजली उत्पादन बढ़ाने में विफल रही है और वर्तमान में जो बिजली मिल रही है, वह समाजवादी सरकार के समय स्थापित इकाइयों से प्राप्त हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में कानपुर की छवि खराब हुई है और कई घटनाओं के कारण शहर बदनाम हुआ है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पुलिस व्यवस्था भ्रष्ट हो गई है और “हथेली गरम, पुलिस नरम” जैसी स्थिति बन गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि कानपुर में बेहतर माहौल और स्पष्ट नियम बनाए जाएं तो बड़े स्तर पर निवेश आकर्षित किया जा सकता है। समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर इटावा, कन्नौज और कानपुर को मिलाकर “ट्रायंगल ट्रेड” के रूप में क्षेत्रीय विकास की योजना लागू की जाएगी। उन्होंने गंगा नदी पर बेहतर रिवरफ्रंट, रियल एस्टेट के सुव्यवस्थित उपयोग, लाल इमली के पुनर्जीवन और उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कही।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर साम्प्रदायिक राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि जब भाजपा कमजोर होती है तो वह कम्युनल रास्ता अपनाती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फर्जी एनकाउंटर के मामले बढ़े हैं और न्याय देने का अधिकार न्यायालय का है, पुलिस का नहीं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश का नौजवान निराश और हताश है क्योंकि सरकार रोजगार और नौकरियां देने में विफल रही है। समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर विकास को गति देने और पीडीए के माध्यम से सभी वर्गों को जोड़ने का दावा भी उन्होंने किया।
धार्मिक मुद्दों पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर सनातन परंपराओं के अपमान का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने सरकार पर सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण और बड़े आर्थिक सौदों को लेकर भी सवाल उठाए।
अंत में उन्होंने कहा कि सरकार देश के बाजार विदेशी ताकतों को सौंप रही है, जिससे “मेक इन इंडिया” और स्वदेशी आंदोलन की भावना प्रभावित हो रही है।



