टीएसएच में कवि सम्मेलन व होली मिलन समारोह, कवियों की रचनाओं पर गूंजती रहीं तालियां


कवि सम्मेलन में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया। कवि हेमंत पांडेय और धीरज सिंह ने अपने चिर-परिचित अंदाज में व्यंग्य की धार से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया, जिस पर लोग ठहाके लगाने को मजबूर हो गए।
- प्रियंका द्विवेदी
कानपुर नगर। स्वरूपनगर स्थित टीएसएच में नगर निगम की ओर से कवि सम्मेलन एवं होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें हास्य, व्यंग्य और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कविताओं ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर प्रमिला पांडेय, कवि हेमंत पांडेय सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम के दौरान कवि धीरज सिंह चंदन ने अपनी पंक्तियां “हर तरफ प्यार की उमंग हो तो होली हो, मन मोहब्बत में भी मलंग हो तो होली हो…” सुनाकर माहौल को उत्साह और तालियों से गुंजायमान कर दिया। कवि सम्मेलन में हास्य के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं को भी श्रोताओं ने खूब सराहा। वहीं कवयित्री शशि श्रेया और नीरू श्रीवास्तव की रचनाओं ने कार्यक्रम में श्रृंगार और संवेदनाओं का रंग घोल दिया।

इस अवसर पर महापौर प्रमिला पांडेय ने कहा कि होली का त्योहार आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज में भारतीय संस्कृति और मूल्यों को सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं। उन्होंने उपस्थित कवियों की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य समाज को सही दिशा देने का सशक्त माध्यम है।
कवि शशि श्रेया ने “होली आई है अब तो तुम आ जाओ…” और सौमेंद्र राज त्रिपाठी ने “एक बार सोचा मैंने, पांडेय जी को खोचा मैंने…” जैसी रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी। दिल्ली से आए कवि अनिल अग्रवंशी ने “चेहरे पे हंसी और दिल में खुशी होती है…” जैसी पंक्तियों से माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया। वहीं कवि गौरव चौहान ने विश्वकप में भारत की जीत पर आधारित अपनी कविता “पृथ्वी राणा वीर शिवा की अमिट विरासत वाले हैं, तुम्हें मुबारक रहे इंडिया, हम तो भारत वाले हैं…” सुनाकर देशभक्ति का जोश भर दिया।

कार्यक्रम में नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय, विधायक अभिजीत सांगा, नीलिमा कटियार, जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण, डॉ. श्लेष त्रिपाठी, पार्षद पवन पांडेय, अभिषेक, नीरज सहित कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



