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यूपी के डॉक्टरों का कमाल: कानपुर और बीएचयू वाराणसी की बड़ी उपलब्धियां, देशभर में हो रही सराहना

GSVM कानपुर में जटिल जबड़ा सर्जरी सफल, BHU में प्रीटर्म शिशु का बिना ओपन सर्जरी इलाज

  • समय टुडे डेस्क।

त्तर प्रदेश में चिकित्सा क्षेत्र से गुरुवार को दो बड़ी सफलताएं सामने आईं, जिनकी देशभर में सराहना हो रही है। कानपुर के GSVM मेडिकल कॉलेज और बीएचयू वाराणसी के डॉक्टरों ने जटिल मामलों में सफलता हासिल कर चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

पैर की हड्डी से बनाया मरीज का जबड़ा, GSVM की बड़ी उपलब्धि

कानपुर स्थित गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (GSVM) के डॉक्टरों ने 62 वर्षीय मरीज के जबड़े के कैंसर की जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

डॉक्टरों ने मरीज के निचले जबड़े को पैर की हड्डी (फाइबुला) की मदद से पुनर्निर्मित किया। इस प्रक्रिया को फाइबुला फ्री फ्लैप रिकंस्ट्रक्शन कहा जाता है, जो जबड़े की संरचना और कार्यक्षमता को पुनः स्थापित करने में बेहद प्रभावी है।

इस जटिल सर्जरी में डॉ. प्रेम शंकर, डॉ. सुषांत लूथरा, डॉ. कुश पाठक, डॉ. सोनल मिश्रा और डॉ. शैलेंद्र सहित विशेषज्ञों की टीम शामिल रही।

BHU में 1.2 किलो प्रीटर्म शिशु का सफल इलाज

वहीं, वाराणसी स्थित IMS BHU ने भी एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां 29 सप्ताह में जन्मे मात्र 1.2 किलोग्राम वजन वाले प्रीटर्म शिशु में PICCOLO डिवाइस क्लोजर तकनीक के जरिए सफल उपचार किया गया।

यह प्रक्रिया बिना ओपन सर्जरी के की गई, जो राज्य में पहली बार बिना बाहरी विशेषज्ञों की मदद के सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह शिशु करीब 30 दिनों तक वेंटिलेटर पर था।

क्या है PICCOLO तकनीक?

विशेषज्ञों के अनुसार, PICCOLO डिवाइस एक कैथेटर आधारित तकनीक है, जिससे हृदय की एक जटिल समस्या (PDA) को बिना सर्जरी के ठीक किया जाता है। इससे जोखिम और निशान दोनों कम होते हैं, और यह भविष्य की आधुनिक चिकित्सा का उदाहरण माना जा रहा है।

इस उपलब्धि में डॉ. प्रतिभा राय, डॉ. विकास, डॉ. प्रताप, डॉ. नितेश सहित कार्डियोलॉजी, एनेस्थीसिया, सीटीवीएस और नवजात देखभाल की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

चिकित्सा क्षेत्र में यूपी का बढ़ता गौरव

दोनों संस्थानों की इन सफलताओं ने यह साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल संस्थान भी अब जटिल और अत्याधुनिक उपचार में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

इन उपलब्धियों से न केवल मरीजों को नई उम्मीद मिली है, बल्कि प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था की साख भी मजबूत हुई है।

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