3000 सैनिक, 10 लड़ाकू विमान और 5 युद्धपोत एक-दूसरे के बेस पर तैनात किए जा सकेंगे
- नेहा पाठक
नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती देते हुए RELOS (रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट) समझौता अब पूरी तरह लागू हो गया है। इस महत्वपूर्ण समझौते के लागू होने से दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का उपयोग कर सकेंगी।
सूत्रों के अनुसार, Vladimir Putin इस वर्ष भारत दौरे पर आ सकते हैं। उनके संभावित दौरे से पहले इस समझौते का जमीन पर लागू होना रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
यह समझौता फरवरी 2025 में दोनों देशों के बीच हुआ था, जिसे अब पूरी तरह से क्रियान्वित कर दिया गया है। रूस ने इससे जुड़े दस्तावेज भी सार्वजनिक कर दिए हैं, जिससे इसकी औपचारिकता और पारदर्शिता स्पष्ट होती है।
क्या है RELOS समझौता?
RELOS के तहत भारत और रूस एक-दूसरे को सैन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करेंगे। इसका मतलब है कि दोनों देश अपने सैन्य संसाधनों के संचालन और रखरखाव के लिए एक-दूसरे के बेस का इस्तेमाल कर सकेंगे।
कितनी होगी तैनाती?
समझौते के तहत एक समय में अधिकतम 3,000 सैनिक, 10 लड़ाकू विमान और 5 युद्धपोत एक-दूसरे के सैन्य अड्डों पर तैनात किए जा सकते हैं। इससे दोनों देशों की संयुक्त सैन्य क्षमता और ऑपरेशनल दक्षता में बड़ा इजाफा होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल भारत-रूस रक्षा संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा संतुलन में भी अहम भूमिका निभाएगा।


