
समन्वय, क्षमता और तत्परता के साथ मजबूत किया जा रहा आपदा प्रतिक्रिया तंत्र—डीजीपी राजीव कृष्ण
- सौरभ शुक्ला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) एवं सेंट्रल कमांड के संयुक्त तत्वावधान में “बाढ़ एवं बाढ़-संबंधी आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी” का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने उद्घाटन सत्र में प्रतिभाग करते हुए आपदा प्रबंधन में अंतर-एजेंसी समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण ने प्रतिभाग किया। अपने संबोधन में उन्होंने यूपी पुलिस की आपदा प्रबंधन रणनीति के पाँच प्रमुख स्तंभ—प्रिवेंशन, प्रिपेयर्डनेस, प्रिडिक्शन, प्रोटेक्शन एवं प्रॉम्प्ट रिस्पॉन्स—का उल्लेख करते हुए जलजनित दुर्घटनाओं में जनहानि रोकने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2017 में SDRF के गठन के बाद प्रदेश की आपदा प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में PAC की 17 बाढ़ राहत कंपनियाँ (51 प्लाटून) तथा SDRF की 6 कंपनियाँ (18 टीमें) सहित लगभग 2500 प्रशिक्षित जवान लगातार आपदा प्रबंधन में तत्पर हैं।
डीजीपी ने यह भी बताया कि जलजनित दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु घाटों की सुरक्षा के लिए विस्तृत SOP लागू की गई है। प्रयागराज महाकुंभ-2025 जैसे विशाल आयोजन में डूबने से एक भी जनहानि न होना यूपी पुलिस की उत्कृष्ट तैयारी और प्रभावी जल सुरक्षा प्रबंधन का उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में 2017 में SDRF के गठन के बाद राज्य की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में 17 फ्लड रिलीफ PAC कंपनियां (51 प्लाटून) तथा 6 SDRF कंपनियां (18 टीमें) लगभग 2500 प्रशिक्षित कर्मियों के साथ किसी भी आपदा से निपटने के लिए तत्पर हैं।
कार्यक्रम में जल शक्ति एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, UPSDMA के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.), प्रमुख सचिव राजस्व अपर्णा यू., बिहार SDMA के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत मिश्रा, सेंट्रल कमांड के GOC-in-C लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।


