जनगणना और परिसीमन से अलग लागू करने की उठी मांग, अखिलेश बोले—महिलाओं को सभी विधायी संस्थाओं में मिले प्रभावी प्रतिनिधित्व
- शालिनी शर्मा
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से सोमवार को पार्टी के राज्य मुख्यालय में महिला संगठनों, विभिन्न नेटवर्कों एवं नागरिक समाज से जुड़े प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत महिला आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करने तथा इसे जनगणना एवं परिसीमन की प्रक्रिया से अलग करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि महिला आरक्षण महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए इसे जनगणना एवं परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से जोड़कर इसके क्रियान्वयन में विलंब करना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि संसद के आगामी मानसून सत्र में संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए।
प्रतिनिधियों ने समाजवादी पार्टी से आग्रह किया कि वह संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर मजबूती से आवाज उठाए तथा केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण को जनगणना एवं परिसीमन से अलग कर लागू करने का दबाव बनाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है और उन्हें बिना किसी अतिरिक्त विलंब के राजनीतिक भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए।
इस अवसर पर अखिलेश यादव ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा महिलाओं के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का शीघ्र क्रियान्वयन होना चाहिए और यह केवल लोकसभा तक सीमित न रहकर राज्यसभा एवं विधान परिषद में भी लागू किया जाना चाहिए, ताकि महिलाओं को सभी विधायी संस्थाओं में समान और प्रभावी प्रतिनिधित्व मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल में रूपरेखा वर्मा, मधु गुप्ता, वंदना मिश्रा, सरोजिनी बिष्ट, मीना सिंह, कान्ति मिश्रा, वंदना राय, नाईश हसन एवं रीता चौधरी सहित कई महिला प्रतिनिधि शामिल रहीं।


