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कोरोनरी आर्टरी डिजीज दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण: डॉ. अभिनीत गुप्ता

डॉक्टर्स एसोसिएशन के सेमिनार में हृदय रोगों की रोकथाम और आधुनिक उपचार तकनीकों पर हुई चर्चा

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। हृदय संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर चर्चा के उद्देश्य से डॉक्टर्स एसोसिएशन की ओर से एक चिकित्सीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में विशेषज्ञों ने बताया कि बदलती जीवनशैली के कारण अब हृदय रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

सेमिनार को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिनीत गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में भी हृदय संबंधी गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) आज दुनिया में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है और भारत में होने वाली कुल मौतों में लगभग 28 प्रतिशत मौतें इसी बीमारी के कारण होती हैं।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का सबसे बड़ा लक्ष्य हृदयाघात होने के बाद इलाज करना नहीं, बल्कि उससे पहले ही बीमारी की पहचान कर उसे रोकना है। उन्होंने बताया कि अनियमित खान-पान, तनाव, पर्याप्त नींद न लेना, शारीरिक निष्क्रियता और लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करना हृदय रोगों के प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सीटी एंजियोग्राफी, इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (IVUS) और एफएफआर (FFR) जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज की बेहद सटीक जांच संभव हो गई है। इससे मरीजों को अनावश्यक स्टेंट लगाने से बचाया जा सकता है और उपचार अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. बी.एन. आचार्य ने कहा कि यदि लोग अपनी दैनिक दिनचर्या में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव करें, जैसे सुबह नियमित व्यायाम करना, संतुलित एवं घरेलू भोजन करना, समय पर सोना और मानसिक तनाव से बचना, तो हृदय रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

एसोसिएशन के सचिव डॉ. जगदीश सिंह ने कहा कि इस प्रकार के चिकित्सीय सेमिनार डॉक्टरों को आधुनिक चिकित्सा तकनीकों और उपचार पद्धतियों की नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों को चिकित्सा क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

सेमिनार में शहर के कई वरिष्ठ चिकित्सकों, हृदय रोग विशेषज्ञों और मेडिकल प्रोफेशनल्स ने भाग लिया तथा हृदय रोगों की रोकथाम और बेहतर उपचार को लेकर अपने विचार साझा किए।

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