HomeNEWSभाजपा सरकार भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों का प्रतीक: अखिलेश यादव

भाजपा सरकार भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों का प्रतीक: अखिलेश यादव

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं में अनियमितताओं का लगाया आरोप

  • अखिलेश कुमार अग्रहरि

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा नेताओं का सबसे बड़ा संकट यह है कि अब यदि वे जनता से दंडवत होकर माफी भी मांगें, तब भी जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। उनका आरोप था कि भाजपा ने जनता से किए गए वादों को कभी पूरा नहीं किया और अब जनता का विश्वास पूरी तरह खो चुकी है।

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा की राजनीति विरोधियों पर माफी मांगने का दबाव बनाने और बयान बदलवाने तक सीमित रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी नकारात्मक राजनीति से जनता में भाजपा के प्रति नाराजगी और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा का अहंकार ही उसकी सरकार के पतन का कारण बनेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग हर विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने दावा किया कि एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं से लेकर जल जीवन मिशन तक में कमीशनखोरी और अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि कहीं सड़कें टूट रही हैं तो कहीं पानी की टंकियां गिर रही हैं, जिससे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क पर गड्ढे और धंसने जैसी समस्याएं सामने आ गईं। उनके अनुसार 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे में 17 दिनों के भीतर दूसरी बार मरम्मत की नौबत आ गई। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे में इसी प्रकार की खामियां सामने आई थीं।

अखिलेश यादव ने बटेश्वर कॉरिडोर निर्माण कार्य में भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि निर्माण में मानकों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना मजबूत आधार के सीधे मिट्टी पर पीसीसी डाली जा रही है, घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग हो रहा है और डिजाइन संबंधी खामियों की शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वालों को धमकियां दी जा रही हैं।

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