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खून में इन्फेक्शन (सेप्सिस) कितना खतरनाक? जानिए कारण, लक्षण और बचाव के जरूरी उपाय

मारे शरीर में दौड़ने वाला रक्त केवल ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुंचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के सुचारु संचालन के लिए सबसे महत्वपूर्ण जैविक तंत्र है। यदि इसी रक्त में संक्रमण फैल जाए तो यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञ इसे सेप्सिस (Sepsis) कहते हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है।

मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. आर.एस. मिश्रा के अनुसार, शरीर के किसी भी हिस्से में हुआ संक्रमण यदि समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो वह रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैल सकता है। यही स्थिति सेप्सिस कहलाती है और इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।

सेप्सिस क्या है?

सेप्सिस ब्लड इन्फेक्शन की गंभीर अवस्था है। अधिकांश मामलों में यह बैक्टीरिया के कारण होता है, लेकिन वायरस, फंगस या अन्य सूक्ष्म जीव भी इसका कारण बन सकते हैं। जब संक्रमण शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर पूरे शरीर में फैल जाता है, तब यह कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।

किन संक्रमणों से बढ़ता है खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार फेफड़ों का संक्रमण (निमोनिया), मूत्र मार्ग (यूरिनरी ट्रैक्ट) का संक्रमण, त्वचा के गहरे घाव या किसी ऑपरेशन के बाद हुआ संक्रमण समय पर उपचार न मिलने पर रक्त तक पहुंच सकता है। कई बार सामान्य दिखने वाला संक्रमण भी तेजी से गंभीर रूप ले सकता है।

किन लोगों को सबसे अधिक खतरा?

सेप्सिस का खतरा सभी को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसकी संभावना अधिक रहती है। इनमें बुजुर्ग, छोटे बच्चे, मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज, कैंसर, किडनी या लिवर रोग से पीड़ित व्यक्ति तथा कमजोर प्रतिरक्षा क्षमता (इम्यूनिटी) वाले लोग शामिल हैं। लंबे समय तक इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेने वाले मरीज भी उच्च जोखिम की श्रेणी में आते हैं।

सेप्सिस के शुरुआती लक्षण

सेप्सिस की पहचान समय रहते होना बेहद जरूरी है। इसके प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं—

  • तेज या बार-बार बुखार
  • शरीर का तापमान सामान्य से कम हो जाना
  • तेज धड़कन
  • सांस लेने में तेजी
  • अत्यधिक कमजोरी
  • भ्रम या मानसिक असमंजस
  • बेहोशी जैसी स्थिति
  • पेशाब कम आना
  • ब्लड प्रेशर का कम होना

इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

खुद से एंटीबायोटिक लेना हो सकता है खतरनाक

विशेषज्ञों का कहना है कि मामूली संक्रमण को नजरअंदाज करना या डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना गंभीर परिणाम दे सकता है। सही जांच और मरीज की स्थिति के अनुसार ही डॉक्टर उचित दवा और उपचार तय करते हैं। इसलिए किसी भी संक्रमण के बढ़ने पर स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

बचाव ही सबसे बेहतर उपाय

स्वच्छता का ध्यान रखना, संक्रमण का समय पर उपचार कराना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना और गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तत्काल अस्पताल पहुंचना सेप्सिस से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल स्वास्थ्य संबंधी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। किसी भी बीमारी के निदान या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। samaytoday.in इस जानकारी के आधार पर किसी प्रकार की चिकित्सीय जिम्मेदारी का दावा नहीं करता।

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