51 साल पुराने भूमि विवाद में हाईकोर्ट ने खारिज की अपील, रिश्तेदार वीएम सिंह के नाम नामांतरण का रास्ता साफ
- रितिका शुक्ला
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को भोपाल स्थित 522 एकड़ पुश्तैनी जमीन के मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मेनका गांधी और उनकी बहन अंबिका शुक्ला की रिट अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही भोपाल के बहेटा, बोरबन और लाऊखेड़ी क्षेत्र की विवादित जमीन पर उनके रिश्तेदार वीएम सिंह के नाम नामांतरण का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजस्व अधिकारियों ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। इस निर्णय के साथ करीब 51 वर्षों से चल रहा पुश्तैनी जमीन का विवाद समाप्त हो गया है।
1975 से चल रहा था विवाद
यह मामला वर्ष 1975 में दिल्ली हाईकोर्ट में दायर विभाजन वाद से शुरू हुआ था। बाद में पारिवारिक समझौते के आधार पर वर्ष 1993 में दिल्ली हाईकोर्ट ने डिक्री पारित की थी। मेनका गांधी ने इस समझौते को चुनौती दी थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उस डिक्री को बरकरार रखा।
इसके बाद विवाद राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने (नामांतरण) को लेकर जारी रहा। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने ताजा फैसले में स्पष्ट किया कि पारिवारिक समझौते के बाद अपीलकर्ताओं के अधिकार समाप्त हो चुके थे।
मां द्वारा अधिकार छोड़ना पड़ा भारी
मामले की सुनवाई के दौरान वीएम सिंह की ओर से कहा गया कि मेनका गांधी की मां ने मध्य प्रदेश की पुश्तैनी जमीनों और अन्य संपत्तियों पर स्वयं तथा अपने उत्तराधिकारियों के अधिकारों का त्याग कर दिया था। इसी आधार पर संपत्तियां उनके नाम दर्ज की गई थीं।
वीएम सिंह ने यह भी तर्क दिया कि जिन आपत्तियों को पहले ही सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है, उन्हीं मुद्दों को दोबारा उठाकर विवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया।
मेनका गांधी ने क्या कहा था?
मेनका गांधी और उनकी बहन अंबिका शुक्ला ने अपनी याचिका में दावा किया था कि भोपाल की हुजूर तहसील स्थित लाऊखेड़ी की जमीन के नामांतरण संबंधी आदेश में उन्हें पक्षकार नहीं बनाया गया और उनकी जानकारी के बिना प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
हालांकि, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और वीएम सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रिट अपील खारिज कर दी। इसके बाद विवादित 522 एकड़ पुश्तैनी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में वीएम सिंह के नाम नामांतरण का मार्ग पूरी तरह साफ हो गया।


