भारतीय बाल रोग अकादमी ने पारस हॉस्पिटल में स्तनपान के महत्व पर किया जागरूक
हरिओम गुप्ता
कानपुर। विश्व स्तनपान सप्ताह के समापन अवसर पर भारतीय बाल रोग अकादमी द्वारा पारस हॉस्पिटल, बिठूर में नर्सिंग स्टाफ के लिए स्तनपान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 35 नर्सिंग स्टाफ ने सहभागिता कर स्तनपान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शीला चित्रांशी, डॉ. प्रीति शुक्ला एवं डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने किया।
डॉ. शीला चित्रांशी ने बताया कि स्तनपान का अर्थ शिशु को सीधे मां का दूध पिलाना है। उन्होंने कहा कि नवजात शिशु सामान्यतः हर दो से तीन घंटे में दूध पीते हैं और जैसे-जैसे उनकी आयु बढ़ती है, स्तनपान की आवृत्ति में परिवर्तन आता है। उन्होंने बताया कि मां के दूध में विटामिन, वसा, प्रोटीन एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो शिशु के संपूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
डॉ. प्रीति शुक्ला ने कहा कि स्तनपान केवल शिशु ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद गर्भाशय जल्दी सामान्य आकार में लौट आता है तथा स्तन कैंसर सहित कई अन्य बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने स्तनपान से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए नर्सिंग स्टाफ की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विश्व स्तनपान सप्ताह के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले पत्रकारों एवं सभी सहयोगियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।


