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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹1.55 करोड़ की ठगी, साइबर पुलिस ने पीड़िता को लौटाए ₹43.14 लाख

आधार कार्ड के आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने का भय दिखाकर साइबर अपराधियों ने की थी ठगी, फर्जी एटीएस अधिकारी बनकर किया था डिजिटल अरेस्ट

  • शालिनी शर्मा

लखनऊ। साइबर अपराधियों द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर की गई बड़ी साइबर ठगी के मामले में लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता को बड़ी राहत दिलाई है। साइबर अपराधियों ने पीड़िता को उसके आधार नंबर के गैर-कानूनी एवं आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल होने का भय दिखाकर करीब ₹1 करोड़ 55 लाख की साइबर ठगी की थी।

आरोपियों ने स्वयं को एटीएस डिपार्टमेंट, पुणे, महाराष्ट्र का अधिकारी बताते हुए पीड़िता को अपने जाल में फंसाया और उसे डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर अलग-अलग खातों में धनराशि ट्रांसफर कराई।

मामले की जानकारी मिलने के बाद थाना साइबर क्राइम पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस टीम ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए विभिन्न फ्रॉड बैंक खातों को फ्रीज कराया और ठगी गई रकम की रिकवरी के प्रयास तेज किए।

पुलिस की प्रभावी कार्रवाई के परिणामस्वरूप ठगी गई धनराशि में से ₹43 लाख 14 हजार 24 रुपये पीड़िता को वापस करा दिए गए।

साइबर पुलिस की इस कार्रवाई से पीड़िता को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा पुलिस, एटीएस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन किए जाने और डिजिटल अरेस्ट की धमकी दिए जाने पर घबराएं नहीं तथा बिना सत्यापन किसी खाते में धनराशि ट्रांसफर न करें।

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