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क्राइस्ट चर्च कॉलेज में महिला सशक्तिकरण की गूंज, नाटक और ओपन माइक ने दिया समानता का संदेश

‘सशक्त नारी, सशक्त कल’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने प्रस्तुत किए प्रेरणादायी विचार, महिलाओं के संघर्ष और उपलब्धियों को किया उजागर

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के जेंडर सेंसिटाइजेशन एवं महिला विकास प्रकोष्ठ द्वारा महिला सशक्तिकरण और जेंडर संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘सशक्त नारी, सशक्त कल’ थीम पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. सबीना बोदरा, मुख्य अतिथि प्रो. नीता जैन एवं विशिष्ट अतिथि प्रो. सुफिया शाहब की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत लघु नाटिका ‘अद्रिजा : हर युग की प्रतिध्वनि’ रही। नाटिका के माध्यम से सावित्रीबाई फुले, छवि राजावत, कल्पना सरोज एवं आईपीएस अधिकारी रवीना त्यागी जैसी प्रेरणादायी महिलाओं के संघर्ष, उपलब्धियों और समाज के प्रति उनके योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि महिलाएँ अपनी प्रतिभा, दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व क्षमता के बल पर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

नाटिका के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता, समान अवसर और सामाजिक रूढ़ियों को दूर करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने महिला अधिकारों एवं लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।

इसके पश्चात आयोजित ओपन माइक सत्र में विद्यार्थियों ने लैंगिक समानता, महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। इस सत्र ने विद्यार्थियों को अपनी अभिव्यक्ति के लिए मंच प्रदान किया और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का समन्वय प्रो. विभा दीक्षित ने किया। आयोजन में प्रो. मनीषी त्रिवेदी एवं महिला विकास प्रकोष्ठ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में डॉ. अर्चना वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को महिलाओं के प्रति सम्मान, समानता और संवेदनशीलता की भावना विकसित करने का संदेश दिया गया। साथ ही एक ऐसे समावेशी समाज के निर्माण पर बल दिया गया, जहाँ महिलाओं को समान अवसर, सुरक्षा और सम्मान प्राप्त हो तथा वे अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ सकें।

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