विज्ञान, सादगी और राष्ट्रसेवा का अद्वितीय संगम थे भारत के ‘मिसाइल मैन’, उनकी विचारधारा आज भी युवाओं को विकसित भारत के निर्माण की राह दिखाती है
भारत के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनके पद, उपलब्धियों या सम्मान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे अपने विचारों, कार्यों और जीवन मूल्यों से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन जाते हैं। भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक और ‘मिसाइल मैन’ के नाम से विख्यात डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ऐसे ही व्यक्तित्व थे। उनकी जयंती केवल एक महान वैज्ञानिक को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके सपनों, आदर्शों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को अपने जीवन में उतारने का भी अवसर है।
डॉ. कलाम ने अपने वैज्ञानिक योगदान से भारत को रक्षा एवं अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश की सामरिक क्षमता को मजबूत बनाने और स्वदेशी तकनीक के विकास के प्रति उनका समर्पण भारतीय विज्ञान के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। लेकिन उनकी महानता केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं थी। वे मानते थे कि किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके नागरिकों, विशेषकर युवाओं के ज्ञान, चरित्र, मेहनत और रचनात्मक सोच में निहित होती है।
डॉ. कलाम का जीवन इस बात का उदाहरण है कि साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और निरंतर परिश्रम के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक की यात्रा तय की। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनकी पहचान एक ऐसे सरल, संवेदनशील और जनप्रिय व्यक्ति की रही, जो विद्यार्थियों के बीच समय बिताना और उनके प्रश्नों का उत्तर देना पसंद करते थे। उनके लिए युवाओं से संवाद करना केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने का माध्यम था।
आज जब भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है, तब डॉ. कलाम के विचारों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक प्रगति, आधुनिक तकनीक या बड़े बुनियादी ढांचे से पूरा नहीं होगा। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक समानता, नैतिक मूल्यों और नागरिक जिम्मेदारी को भी उतना ही महत्व देना होगा। विकास तभी सार्थक होगा, जब उसके लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचेंगे और प्रत्येक युवा को अपनी क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा।

डॉ. कलाम ने युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी। आज इस संदेश को शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, अनुसंधान और कौशल विकास से जोड़ना आवश्यक है। विद्यार्थियों में केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने की प्रवृत्ति के बजाय जिज्ञासा, नवाचार, समस्या समाधान और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करनी होगी। शिक्षण संस्थानों को ऐसी परिस्थितियां तैयार करनी होंगी, जहां युवा प्रश्न पूछ सकें, नए विचार प्रस्तुत कर सकें और असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ सकें।
उनका जीवन यह भी सिखाता है कि विज्ञान और तकनीक का उद्देश्य केवल उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ किसानों, श्रमिकों, विद्यार्थियों, मरीजों और समाज के वंचित वर्गों तक पहुंचना चाहिए। तकनीकी प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनशीलता को बनाए रखना भी जरूरी है। यही वह व्यापक दृष्टि है, जो विकास को वास्तविक अर्थों में जनकल्याण से जोड़ती है।
डॉ. कलाम की जयंती पर देश के विभिन्न नेताओं द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना उनके राष्ट्रीय योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान और मनोहर लाल सहित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनके वैज्ञानिक योगदान, सादगी और राष्ट्रसेवा को याद किया। इन श्रद्धांजलियों के बीच सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि हम उनके आदर्शों को अपने व्यवहार और कार्यों में कितना स्थान दे पा रहे हैं।
किसी महापुरुष को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करने या उनके विचारों को दोहराने से पूरी नहीं होती। उनके बताए रास्ते पर चलना, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना, शिक्षा को महत्व देना और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही उनके प्रति वास्तविक सम्मान है। यदि विद्यार्थी ज्ञान के प्रति समर्पित हों, शिक्षक नई पीढ़ी में वैज्ञानिक सोच विकसित करें, संस्थान नवाचार को प्रोत्साहित करें और नागरिक राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें, तो यही डॉ. कलाम के सपनों को साकार करने की दिशा में सार्थक कदम होंगे।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, वैज्ञानिक योगदान और प्रेरणादायी जीवन आज भी देश की सामूहिक चेतना का हिस्सा हैं। उनकी जयंती हमें याद दिलाती है कि किसी राष्ट्र का भविष्य केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की आकांक्षाओं, मेहनत और चरित्र से तय होता है। आवश्यकता इस बात की है कि हम उनके संदेश को समारोहों तक सीमित न रखें, बल्कि उसे शिक्षा, अनुसंधान, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय विकास के प्रत्येक क्षेत्र में व्यवहार का हिस्सा बनाएं।
डॉ. कलाम के सपनों का भारत वही होगा, जहां हर बच्चे को शिक्षा, हर युवा को अवसर, हर प्रतिभा को प्रोत्साहन और हर नागरिक को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी मिले। यही ‘मिसाइल मैन’ को सच्ची श्रद्धांजलि और विकसित भारत के संकल्प को सार्थक करने का मार्ग है।

– सौरभ शुक्ला


