
एसएसवीएम कॉलेज झींझक में मनोरंजक गतिविधियों के जरिए दिया जा रहा गणितीय आकृतियों का व्यावहारिक ज्ञान
- आशीष तिवारी
कानपुर देहात।एसएसवीएम कॉलेज झींझक में बच्चों को पढ़ाई के साथ मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से गणितीय ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्य अर्चना ने क्राफ्ट कला के प्रयोग से विद्यार्थियों को गोलाकार, अंडाकार एवं परवलयाकार जैसी ज्यामितीय आकृतियों के बीच अंतर समझाया। उन्होंने बच्चों को विभिन्न आकृतियों के मॉडल बनवाकर उनके आकार और विशेषताओं की व्यावहारिक जानकारी दी।
प्रधानाचार्य अर्चना ने बताया कि गोलाकार और गोले में अंतर होता है। गोलाकार एक द्विविमीय समतल आकृति है, जो सिक्के, चूड़ी और डिस्क जैसी दिखाई देती है, जबकि गोला एक त्रिविमीय ठोस आकृति है, जिसका उदाहरण गेंद और फुटबॉल हैं। गोले की सतह के प्रत्येक बिंदु की केंद्र से दूरी समान होती है।
उन्होंने परवलयाकार आकृति के बारे में बताते हुए कहा कि जब किसी वस्तु को हवा में ऊपर की ओर फेंका जाता है, तो उसका मार्ग सामान्य परिस्थितियों में परवलयाकार होता है। परवलय अंग्रेजी के अक्षर ‘U’ जैसा दिखाई देने वाला एक समतलीय वक्र है। गणित में इसे एक विशेष शांकव के रूप में परिभाषित किया जाता है।
इसी प्रकार उन्होंने अंडाकार आकृति की विशेषताओं को समझाते हुए बताया कि अंडाकार शब्द लैटिन भाषा के ‘ओवम’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ अंडा होता है। इसका त्रिविमीय रूप ओवॉइड कहलाता है। क्राफ्ट कला के माध्यम से बच्चों ने इन सभी आकृतियों को बनाकर उनके स्वरूप और आपसी अंतर को आसानी से समझा।
गतिविधि में शामिल शिवानी, नैंसी, मीनाक्षी, शिवम, आख्या, अगस्त्यम् आदि विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने कहा कि क्राफ्ट कला के माध्यम से उन्हें परवलयाकार जैसी नई ज्यामितीय आकृति के बारे में पहली बार रोचक ढंग से जानने और समझने का अवसर मिला।
विद्यालय की इस पहल से विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि बढ़ रही है और वे खेल-खेल में कठिन विषयों को भी आसानी से सीख रहे हैं।

