
जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने, मिट्टी की जांच कराने और संतुलित उर्वरकों के इस्तेमाल पर दिया जोर
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ, कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कानपुर एवं कृषि विभाग उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ में ‘खेत बचाओ अभियान’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने तथा रासायनिक उर्वरकों का संतुलित मात्रा में उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेतों की उर्वरता बनाए रखने के लिए किसानों को अपनी मिट्टी की नियमित जांच करानी चाहिए और सॉयल हेल्थ कार्ड में दी गई सिफारिशों के अनुसार ही खेती करनी चाहिए।
इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास के बिना देश और प्रदेश की समग्र प्रगति संभव नहीं है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक पद्धतियों, संतुलित उर्वरकों और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की अपील की।
वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने किया प्रतिभाग
कार्यक्रम में आईसीएआर-आईएसआरआई, लखनऊ के निदेशक डॉ. एस.एन. सुशील, अटारी कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेन्द्र सिंह तथा उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण की निदेशक डॉ. कनीज फातिमा सहित लखनऊ एवं आसपास के विभिन्न आईसीएआर संस्थानों के निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिक मौजूद रहे।
इसके अलावा लखनऊ, उन्नाव, हरदोई और बाराबंकी जनपदों के कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों के साथ बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
खेती की चुनौतियों और लागत कम करने पर हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान किसानों के साथ खेती से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों, कृषि लागत कम करने के उपायों, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण तथा सरकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना तथा वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।

