हर छह में से एक व्यक्ति अकेलेपन का शिकार, हर वर्ष लाखों लोगों की हो रही मौत
- समय टुडे डेस्क।
स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के दौर में लोगों के बीच संवाद और संपर्क पहले की तुलना में आसान हुआ है, लेकिन इसके बावजूद दुनिया भर में करोड़ों लोग अकेलेपन की समस्या से जूझ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अकेलापन केवल एक भावनात्मक स्थिति नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अकेलेपन का प्रभाव धूम्रपान और मोटापे जितना खतरनाक हो सकता है। यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है तथा गंभीर बीमारियों और समयपूर्व मृत्यु का कारण भी बन सकता है।
हर छह में से एक व्यक्ति महसूस कर रहा अकेलापन
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में हर छह में से एक व्यक्ति अकेलेपन का सामना कर रहा है। सामाजिक अलगाव और अकेलेपन के कारण प्रतिवर्ष लगभग 8.71 लाख लोगों की मौत हो जाती है। औसतन हर घंटे करीब 100 मौतें अकेलेपन से जुड़ी समस्याओं के कारण होती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक सामाजिक दूरी और भावनात्मक अलगाव व्यक्ति के मानसिक संतुलन के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
बढ़ सकता है इन बीमारियों का खतरा
लंबे समय तक अकेलेपन की स्थिति कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। इनमें प्रमुख रूप से—
- अवसाद (डिप्रेशन) और चिंता (एंग्जायटी)
- हृदय रोग
- उच्च रक्तचाप
- मधुमेह
- डिमेंशिया
- अनिद्रा एवं नींद संबंधी समस्याएं
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव और सामाजिक अलगाव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।
इन लोगों में अधिक देखी जाती है समस्या
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में बताया गया है कि अकेलापन किसी भी आयु वर्ग को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ वर्गों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है। इनमें किशोर और युवा, बुजुर्ग, कम आय वाले लोग, अकेले रहने वाले व्यक्ति तथा दिव्यांगजन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
कैसे करें अकेलेपन से बचाव?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके अकेलेपन की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए—
- परिवार और मित्रों से नियमित संवाद बनाए रखें।
- मोबाइल और स्क्रीन टाइम को सीमित करें।
- सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों में भाग लें।
- योग, ध्यान और नियमित व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें।
- जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।
विशेषज्ञों का कहना है कि अकेलेपन को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते सहायता और संवाद के माध्यम से इस समस्या से बाहर निकला जा सकता है तथा बेहतर मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।


