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अवैध बेसमेंटों पर कब होगी कार्रवाई? शहर में धड़ल्ले से चल रही व्यावसायिक गतिविधियां

कोचिंग, अस्पताल, शोरूम और गोदाम बने खतरे का कारण, हादसों के बाद ही जागता है प्रशासन

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। दिल्ली और लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांडों के बाद एक बार फिर कानपुर शहर में अवैध बेसमेंटों का मुद्दा चर्चा में आ गया है। हालिया घटनाओं के बाद प्रशासन ने जांच और निरीक्षण की प्रक्रिया तेज कर दी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि वर्षों से शहर में संचालित हो रहे इन अवैध बेसमेंटों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

शहर के अनेक क्षेत्रों में बेसमेंटों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इनमें कोचिंग संस्थान, शोरूम, कार्यालय, अस्पताल, गोदाम और अन्य प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आपात स्थिति में इन स्थानों से सुरक्षित निकासी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण किसी भी दुर्घटना की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है।

कोचिंग संस्थानों और छात्रावासों में बढ़ रहा जोखिम

काकादेव, गीता नगर, विनायकपुर, रोशन नगर तथा आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर बेसमेंटों में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा बाहरी जिलों से आने वाले छात्रों के लिए कई आवासीय भवनों को छात्रावास के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, कुछ स्थानों पर बेसमेंटों में छोटे-छोटे कमरे बनाकर छात्रों को किराये पर दिया जा रहा है। कई भवनों में भोजन व्यवस्था भी बेसमेंट में ही संचालित की जाती है, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं और बढ़ जाती हैं।

अस्पतालों और ओपीडी संचालन पर भी सवाल

शहर के कई निजी अस्पतालों में बेसमेंट का उपयोग ओपीडी, वार्ड अथवा अन्य चिकित्सीय सेवाओं के लिए किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी अस्पताल में आपात स्थिति उत्पन्न होती है तो मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षित निकासी बड़ी चुनौती बन सकती है।

कई अस्पतालों में बेसमेंट तक पहुंचने और बाहर निकलने के लिए सीमित मार्ग उपलब्ध हैं, जिससे दुर्घटना की स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है।

बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में व्यापक उपयोग

गोविंद नगर, गुमटी नंबर-5, नवीन मार्केट, पीपीएन मार्केट, शिवाला, मेस्टन रोड, नई सड़क, चमनगंज, कलक्टरगंज, स्वरूप नगर, आर्य नगर, हूलागंज, बिरहाना रोड, माल रोड और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बेसमेंटों का उपयोग व्यापारिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

कुछ स्थानों पर बेसमेंटों में शोरूम, गोदाम और कार्यालय संचालित हो रहे हैं। व्यापारियों द्वारा अपनी आवश्यकताओं के अनुसार गहरे बेसमेंट तैयार कर उनका उपयोग किया जा रहा है।

होटलों और गोदामों में भी बढ़ा उपयोग

शहर के कई होटलों में पार्किंग के लिए स्वीकृत बेसमेंटों का उपयोग अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। जनरलगंज, कर्नलगंज, हालसी रोड, नई सड़क और भीड़भाड़ वाले अन्य क्षेत्रों में भी बेसमेंटों का उपयोग गोदाम एवं व्यापारिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

लखनऊ अग्निकांड के बाद विकास प्राधिकरण और संबंधित विभागों ने कई स्थानों पर निरीक्षण कर नोटिस जारी किए हैं तथा कुछ प्रतिष्ठानों को सील भी किया गया है। हालांकि आम लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि वर्षों से संचालित हो रहे इन अवैध निर्माणों और गतिविधियों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि भवन निर्माण मानकों, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन निकासी मार्गों की नियमित जांच आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।

सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता

शहर में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के बीच भवनों में अग्नि सुरक्षा उपकरण, वैकल्पिक निकास मार्ग, वेंटिलेशन व्यवस्था और आपदा प्रबंधन संबंधी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करना समय की मांग बन गया है।

लखनऊ और दिल्ली जैसी घटनाओं के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं और अवैध निर्माणों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

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