चार साल से हर्निया से परेशान 41 वर्षीय मरीज की फंसी बड़ी आंत को लैप्रोस्कोपिक TAPP तकनीक से किया गया सुरक्षित मुक्त, मोटापा और हाई बीपी बनी बड़ी चुनौती
- मनीष कुमार
कानपुर नगर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर (हैलट) अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक जटिल और चुनौतीपूर्ण हर्निया की सफल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। डॉक्टरों की टीम ने 41 वर्षीय मरीज के बाईं ओर फंसे जटिल Left Inguinoscrotal Hernia का दूरबीन विधि से सफल ऑपरेशन किया।
गोविंद नगर निवासी मरीज पिछले करीब चार वर्षों से हर्निया की समस्या से परेशान था। पिछले चार दिनों से हर्निया की सूजन वापस अंदर नहीं जा रही थी और मरीज को असहनीय दर्द हो रहा था। स्थिति गंभीर होने पर उसे एलएलआर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जांच में हर्निया की थैली में फंसी मिली बड़ी आंत
अस्पताल में चिकित्सकों ने मरीज का विस्तृत परीक्षण और आवश्यक जांच की। जांच में सामने आया कि मरीज स्लाइडिंग हर्निया से पीड़ित था। इसमें सिग्मॉइड कोलन यानी बड़ी आंत का एक हिस्सा हर्निया की थैली में फंस गया था, जिससे आंत में रुकावट की स्थिति पैदा हो रही थी।
इसके साथ ही मरीज में कॉर्ड लिपोमा यानी चर्बी की गांठ भी पाई गई। चार दिनों से आंत के फंसे होने के कारण मरीज की स्थिति बिगड़ने की आशंका थी और चिकित्सकों ने तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया।
मोटापा और हाई बीपी ने बढ़ाई चुनौती
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि यह सर्जरी तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण थी। मरीज का BMI 34 था, जो मोटापे की स्थिति को दर्शाता है। इसके अलावा मरीज उच्च रक्तचाप से भी पीड़ित था।
पुराना हर्निया, हर्निया में फंसी बड़ी आंत, मोटापा और हाई बीपी—इन सभी परिस्थितियों के बावजूद चिकित्सकों ने पारंपरिक बड़े चीरे के बजाय आधुनिक TAPP (Transabdominal Preperitoneal) लैप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
छोटे चीरे से सुरक्षित बाहर निकाली गई फंसी आंत
विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने TAPP तकनीक के माध्यम से पेट में छोटे चीरे बनाकर दूरबीन की सहायता से फंसी हुई बड़ी आंत को सावधानीपूर्वक मुक्त किया। इसके बाद हर्निया की आवश्यक रिपेयर की गई।
सफल ऑपरेशन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला, डॉ. आर.के. जौहरी और डॉ. अनुराग सिंह के नेतृत्व में किया गया। सर्जिकल टीम में जूनियर डॉक्टर डॉ. आलोक, डॉ. मुकेश, डॉ. सूर्यांश, डॉ. विशाल, डॉ. शशांक और डॉ. शाश्वत शामिल रहे।
एनेस्थीसिया टीम ने संभाली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
मरीज के मोटापे और उच्च रक्तचाप को देखते हुए एनेस्थीसिया के दौरान उसके महत्वपूर्ण शारीरिक मानकों को स्थिर रखना भी चिकित्सकों के लिए चुनौतीपूर्ण था। एनेस्थीसिया टीम ने डॉ. अपूर्वा के नेतृत्व में डॉ. नेहा, डॉ. हिरदेश, डॉ. ध्रुविका और डॉ. रक्षा ने यह जिम्मेदारी संभाली।
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई गई है। किसी बड़ी जटिलता के बिना उसे पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
चिकित्सकों के अनुसार, इस तरह की जटिल स्थिति में लैप्रोस्कोपिक तकनीक का सफल प्रयोग एलएलआर अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक सर्जिकल सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम की क्षमता को दर्शाता है।


