
शिशु से किशोरावस्था तक पोषण, स्तनपान और संतुलित आहार पर विशेषज्ञों ने साझा की नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी; करीब 40 बाल रोग विशेषज्ञ हुए शामिल
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर।। एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, कानपुर की ओर से सेंट्रल IAP A to Z पीडियाट्रिक्स न्यूट्रीशन मॉड्यूल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिशु से लेकर किशोरावस्था तक पोषण, स्तनपान, पूरक आहार और स्वस्थ खान-पान की आदतों से संबंधित नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी बाल रोग विशेषज्ञों तक पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, कानपुर के अध्यक्ष डॉ. जे.के. गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में लखनऊ से आमंत्रित विशेषज्ञ फैकल्टी डॉ. संजय निरंजन एवं डॉ. अमित रस्तोगी तथा कानपुर से डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए। कार्यक्रम में करीब 40 बाल रोग विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता की।
मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम पोषण : डॉ. शैलेन्द्र गौतम
डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने स्तनपान पर व्याख्यान देते हुए कहा कि मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम पोषण होने के साथ-साथ संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करने वाली प्राकृतिक प्रतिरक्षा भी देता है। उन्होंने जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने और पहले छह माह तक केवल मां का दूध देने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि छह माह के बाद उचित पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना चाहिए। साथ ही प्री-लैक्टियल फीड, अनावश्यक फॉर्मूला एवं बोतल फीडिंग से बचने तथा प्रसव के बाद माताओं को उचित लैक्टेशन सपोर्ट उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
छह माह बाद विविधतापूर्ण पूरक आहार जरूरी : डॉ. संजय निरंजन
डॉ. संजय निरंजन ने बताया कि छह माह की आयु के बाद केवल स्तनपान शिशु की बढ़ती पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं रहता। ऐसे में समय पर, पर्याप्त और विविधतापूर्ण पूरक आहार देना आवश्यक है। उन्होंने शिशुओं के विकास के लिए संतुलित पोषण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
किशोरावस्था में बढ़ जाती है पोषक तत्वों की जरूरत : डॉ. अमित रस्तोगी
डॉ. अमित रस्तोगी ने कहा कि किशोरावस्था शारीरिक एवं मानसिक विकास की महत्वपूर्ण अवस्था है। इस दौरान शरीर को पोषक तत्वों की आवश्यकता काफी बढ़ जाती है। उन्होंने किशोरों में फल एवं सब्जियों के कम सेवन, दालों और अन्य प्रोटीन स्रोतों की कमी तथा नाश्ता छोड़ने जैसी आदतों पर चिंता जताई।
उन्होंने किशोरों को संतुलित एवं विविध आहार, पर्याप्त प्रोटीन, फल-सब्जियों के नियमित सेवन और समय पर भोजन करने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. शाइनी सेठी ने सभी फैकल्टी, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में करीब 40 बाल रोग विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने मॉड्यूल को बाल पोषण के क्षेत्र में अपने ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को अद्यतन करने की दिशा में उपयोगी बताया।


