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कानपुर में जुटे देशभर के सेवा संगठन, हिंदू आध्यात्मिक सेवा मेले की तैयारियों पर मंथन

बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में हुई बैठक, सेवा संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने और अधिक लोगों को सेवा गतिविधियों से जोड़ने पर जोर

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर। हिंदू आध्यात्मिक सेवा मेले की तैयारियों को लेकर देशभर से आए विभिन्न सामाजिक सेवा संस्थाओं के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, बेनाझाबर में आयोजित हुई। बैठक में मेले के आयोजन, सामाजिक सहभागिता और सेवा कार्यों को व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंचाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए हिंदू आध्यात्मिक सेवा मेला के राष्ट्रीय संयोजक गुणवंत कोठारी ने कहा कि भारत की सेवा परंपरा सदैव समाज को जोड़ने और मानव कल्याण का मार्ग दिखाने वाली रही है। विभिन्न सामाजिक सेवा संस्थाओं को एक मंच पर लाकर उनके सेवा कार्यों को समाज के सामने प्रस्तुत करना मेले का प्रमुख उद्देश्य है।

उन्होंने Global Foundation for Harmony and Civilization का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्व स्तर पर भी अनेक संस्थाएं मानवता, सद्भाव और सभ्यताओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए कार्य कर रही हैं। इन प्रयासों से प्रेरणा लेते हुए भारत की सेवा संस्थाओं को भी अपने कार्यों को व्यापक स्तर पर समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

बैठक में विभिन्न सेवा संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे सेवा कार्यों की जानकारी साझा की और मेले को सफल बनाने के लिए सुझाव दिए। सेवा संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा अधिक से अधिक लोगों को सेवा गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में बताया गया कि मेले में आने वाली सेवा संस्थाओं के कार्यकर्ताओं के ठहरने की व्यवस्था आयोजकों की ओर से की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि आयोजन सरकार से किसी प्रकार का आर्थिक सहयोग लेकर नहीं, बल्कि समाज के सहयोग और चंदे से किया जा रहा है।

गुणवंत कोठारी ने भारतीय समाज की पारंपरिक वानप्रस्थ व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले लोग जीवन के एक चरण में समाज और राष्ट्र के लिए अपना समय समर्पित करते थे। आज उसी सेवा भावना को विभिन्न रूपों में आगे बढ़ाया जा रहा है और सामाजिक संस्थाएं इसका आधुनिक स्वरूप हैं।

उन्होंने सेवा संस्थाओं के कार्यकर्ताओं से मेले में आने वाले लोगों के साथ विनम्र और सहयोगी व्यवहार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मेले में महिलाएं, बच्चे, माताएं और पुरुष सभी वर्गों के लोग आएंगे। कार्यकर्ताओं का व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि प्रत्येक आगंतुक को यह महसूस हो कि यह केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और सद्भाव का आयोजन है।

उन्होंने बताया कि मेले में प्रतिदिन विभिन्न सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही शाम को लगभग 45 मिनट की विशेष गंगा आरती भी आयोजित होगी। उन्होंने कहा कि सेवा संस्थाओं की सहभागिता से यह मेला समाज में सेवा भावना को मजबूत करने और देशभर में चल रहे सेवा कार्यों को एक-दूसरे से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

इस अवसर पर डॉ. उमेश पालीवाल, डॉ. अरविंद दीक्षित, अमरनाथ, आदित्य पोद्दार, नवेन्दु शुक्ला, के.के. दुबे, डॉ. राहुल मिश्रा और डॉ. पूजा श्रीवास्तव सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सामाजिक सेवा संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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