डॉ. संजीव गुप्ता बोले— गुरु केवल ज्ञानदाता नहीं, बल्कि संस्कृति, जीवन मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के संवाहक
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को देश की वैचारिक और सांस्कृतिक शक्ति का आधार बताते हुए गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला।
कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने प्रसिद्ध श्लोक “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥” का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, दर्शन, राष्ट्रोत्थान और संस्कृति के प्रखर संवाहक भी होते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा हमें यह संदेश देती है कि जीवन के आध्यात्मिक और बौद्धिक विकास का मूल आधार गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और सम्मान है। भारत की गुरु-शिष्य परंपरा ने सदियों से समाज को दिशा देने का कार्य किया है और यही परंपरा देश की वैचारिक समृद्धि की मेरुदंड है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि कई बार जो उपलब्धि कठोर साधना से भी संभव नहीं होती, वह गुरु भक्ति और उनके मार्गदर्शन से प्राप्त हो जाती है। वर्तमान समय में जब पूरा विश्व शिक्षा व्यवस्था के पुनर्निर्माण और नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की दिशा में प्रयासरत है, तब भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा एक आदर्श मॉडल के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आत्मसात करते हुए शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करें तथा गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।


