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पीरियड्स के कारण छात्रा को कक्षा से बाहर करना शर्मनाक, जागरूकता की जरूरत : पैड वूमन राखी गंगवार

मासिक धर्म को लेकर भेदभाव पर जताई नाराजगी, स्कूलों में संवेदनशीलता और जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य करने की मांग

चेन्नई के एक सरकारी विद्यालय में कक्षा 6 की एक छात्रा को केवल इसलिए कक्षा से बाहर खड़ा कर दिए जाने का मामला सामने आया है, क्योंकि उसे पीरियड्स शुरू हो गए थे। घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा किया है और मासिक धर्म को लेकर समाज में मौजूद रूढ़िवादी सोच पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ‘पैड वूमन’ के नाम से प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता राखी गंगवार ने कहा कि जब किसी बच्ची को उसके पीरियड्स की वजह से कक्षा से बाहर किया जाता है, तो केवल एक छात्रा ही नहीं, बल्कि उसकी शिक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान भी प्रभावित होता है।

उन्होंने कहा, “पीरियड्स कोई अपराध नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की एक सामान्य और सम्मानजनक प्रक्रिया है। अब समय आ गया है कि स्कूलों में मासिक धर्म को शर्म और संकोच का विषय न मानकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संवेदनशीलता के साथ पढ़ाया जाए।”

राखी गंगवार ने कहा कि आज भी देश के कई हिस्सों में मासिक धर्म को लेकर जागरूकता की कमी है, जिसका असर किशोरियों की शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों का दायित्व है कि वे छात्राओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण प्रदान करें।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग करते हुए कहा कि सभी विद्यालयों में मासिक धर्म जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य किए जाएं। प्रत्येक स्कूल में सैनिटरी पैड की उपलब्धता और स्वच्छ शौचालय सुनिश्चित किए जाएं। साथ ही शिक्षकों को पीरियड्स से जुड़ी संवेदनशीलता का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।

उन्होंने यह भी मांग की कि किसी भी छात्रा के साथ मासिक धर्म के आधार पर भेदभाव किए जाने पर संबंधित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

राखी गंगवार ने कहा, “बेटियों को पीरियड्स के कारण कक्षा से नहीं, बल्कि अज्ञानता को स्कूलों से बाहर निकालने की जरूरत है।”

यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि शिक्षा संस्थानों में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, समानता और सम्मान का वातावरण भी उतना ही आवश्यक है।

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