स्वस्थ रहते हुए रक्तदान कर दिया सेवा और मानवता का संदेश, महिलाओं से भी आगे आने की अपील
नरेश राठौर
झांसी। भारत विकास परिषद की एक सक्रिय महिला सदस्य ने पूर्ण स्वस्थ रहते हुए स्वैच्छिक रक्तदान कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने का सबसे बड़ा माध्यम है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि महिला शक्ति केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि समाज की सबसे बड़ी ताकत भी है। महिलाओं का सेवा, समर्पण और त्याग का भाव सदैव समाज को नई दिशा देता रहा है। उनका यह प्रेरणादायी कदम वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के साहस, सेवा और राष्ट्र समर्पण की भावना की भी याद दिलाता है।
कार्यक्रम में लोगों से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा गया कि यदि कोई महिला पूरी तरह स्वस्थ और रक्तदान के लिए पात्र है, तो उसे बिना किसी भय के रक्तदान करना चाहिए। इससे न केवल किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है, बल्कि समाज में सेवा और मानवता की भावना भी मजबूत होती है।
वक्ताओं ने कहा कि “रक्तदान केवल रक्त देना नहीं, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति को जीवन देने का सबसे सुंदर माध्यम है।” सभी नागरिकों से नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करने तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया गया।
“एक यूनिट रक्त – कई ज़िंदगियों की उम्मीद।”


