किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए किया जागरूक, कृषि यंत्रों के प्रयोग पर दिखाई गई लघु फिल्म
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, दलीप नगर द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम 8 से 12 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में किसानों को फसल अवशेषों को जलाने से होने वाले नुकसान और उनके उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं केंद्र के प्रभारी डॉ. अजय कुमार सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसल अवशेषों में आग लगाने के बजाय उन्हें खेत में ही सड़ाकर जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और खेत की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि फसल अवशेषों को जलाने की बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों एवं उपलब्ध कृषि यंत्रों का प्रयोग कर उनका उचित प्रबंधन करें। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी की सेहत को भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में डॉ. निमिषा अवस्थी ने फसल अवशेष जलाने से होने वाले पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों में आग लगाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। विशेष रूप से बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं इसके धुएं से अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि जनपद में धान और गेहूं का फसल चक्र प्रमुख होने के कारण बड़ी मात्रा में फसल अवशेष उत्पन्न होता है। इन्हें जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव भी नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर जागरूक होने और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को फसलों में प्रयोग होने वाले प्रमुख कृषि यंत्रों एवं उनके उपयोग से संबंधित लघु फिल्म भी दिखाई गई। इसके माध्यम से किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन में कृषि यंत्रों की उपयोगिता और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का सफल संचालन वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेश राय, डॉ. खलील खान, डॉ. अरुण कुमार सिंह एवं डॉ. दीपक मिश्रा सहित प्रगतिशील किसान शिवकुमार, विवेक कुमार, राहुल कुमार, कुलदीप, विष्णु कुमार, राजू राजपूत एवं माया देवी समेत कुल 25 किसानों ने प्रशिक्षण में सहभागिता की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है।


