डेढ़ वर्षीय मासूम की हत्या को अदालत ने माना ‘दुर्लभतम’ श्रेणी का अपराध, जिला जज ने सुनाया मृत्युदंड
- दीपक कुमार
फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के चर्चित आरव हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की हत्या से संबंधित धारा के तहत दोषी मानते हुए इस अपराध को ‘दुर्लभतम श्रेणी’ (Rarest of Rare) का मामला करार दिया। मामले में घटना के करीब 40 दिनों के भीतर फैसला आने को न्यायिक प्रक्रिया की तेज कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
डेढ़ वर्षीय मासूम की बेरहमी से की थी हत्या
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 30 मई 2026 को शिकोहाबाद क्षेत्र की यादव कॉलोनी में आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक डेढ़ वर्षीय आरव को टॉफी दिलाने के बहाने घर से बाहर ले गया। आरोप है कि सुनसान गली में उसने मासूम को कई बार जमीन पर पटक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया था।
प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया गया मामला
जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव उपाध्याय के अनुसार, आरव की मां अपने पति से विवाद के चलते मायके में रह रही थी। इसी दौरान उसकी पहचान बदायूं निवासी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक से हुई, जो रिश्ते में उसका देवर बताया गया। अभियोजन के अनुसार, इसी पृष्ठभूमि में आरोपी ने वारदात को अंजाम दिया।
छह दिन में दाखिल हुई चार्जशीट
घटना के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। बाद में पुलिस मुठभेड़ के दौरान उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस ने मामले की जांच तेजी से पूरी करते हुए छह दिनों के भीतर आरोपपत्र (चार्जशीट) न्यायालय में दाखिल कर दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सीसीटीवी फुटेज सहित कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।
अदालत ने सुनाया मृत्युदंड
गुरुवार को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को दोषी करार देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को जिला जज डॉ. बब्बू सारंग ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई। फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस आरोपी को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल लेकर गई।
पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया। वहीं इस मामले में तेजी से हुई जांच और सुनवाई को लेकर भी व्यापक चर्चा रही।


