
भावनात्मक असंतुलन और अपराध के संबंध पर हुई चर्चा, सीमा हिंगोनिया ने प्रतिभागियों के सवालों के दिए जवाब; 10 दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का हुआ समापन
भावनात्मक जागरूकता केवल व्यक्तिगत जरूरत नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, स्वस्थ और संवेदनशील समाज की नींव भी है। इसी संदेश के साथ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर को ‘फील हील राइज सर्कल’ की ओर से ‘From Emotional Awareness to Mental Wellbeing’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सामाजिक संवेदनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यशाला में राजस्थान राज्य महिला आयोग की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीमा हिंगोनिया और ‘फील हील राइज सर्कल’ की संस्थापक शिवानी शर्मा के बीच भावनात्मक असंतुलन और अपराध के संबंध को लेकर विचार-विमर्श हुआ। चर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न सवाल पूछे, जिनका सीमा हिंगोनिया ने अपने अनुभवों के आधार पर जवाब दिया। संवाद के माध्यम से भावनाओं को समझने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि भावनात्मक जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रतिभागियों ने माना कि इस विषय पर नियमित रूप से और व्यापक स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन के प्रति जागरूक किया जा सके।
इस अवसर पर एक अक्टूबर से ऑनलाइन शुरू हुई 10 दिवसीय कार्यशाला ‘From Emotional Awareness to Mental Well-being’ का समापन समारोह भी आयोजित किया गया। समापन अवसर पर सीमा हिंगोनिया ने प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किए।
कार्यक्रम में शिवानी शर्मा ने मानसिक तनाव को संभालने और वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करने में सहायक कुछ व्यावहारिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। इनमें बॉक्स ब्रीदिंग, 5-4-3-2-1 संवेदी गतिविधि और बाइलेटरल ड्राइंग शामिल रहीं। प्रतिभागियों ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और उनका आनंद लिया।
यह कार्यक्रम अनामिका अनुगूँज के कैफे ‘सुनो सबकी’ में आयोजित किया गया, जिसका संचालन भावना सारस्वत ने किया। आयोजन के माध्यम से भावनात्मक जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और आपसी संवेदनशीलता को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
‘फील हील राइज सर्कल’ की संस्थापक शिवानी शर्मा, जो हैप्पीनेस कोच और होलिस्टिक वेलनेस कोच हैं, ने इस पहल के जरिए भावनाओं को समझने और मानसिक कल्याण को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की जरूरत को रेखांकित किया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि भावनाओं को समझना और उन्हें स्वस्थ तरीके से व्यक्त करना न केवल व्यक्ति के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण है।


