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मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने का संदेश, एसएन सेन कॉलेज में ‘The Unmute Project’ कार्यशाला

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर छात्राओं को तनाव, अवसाद और आत्महत्या के विचारों की पहचान व बचाव के उपायों की दी गई जानकारी

  • सौम्या पाण्डेय

कानपुर नगर। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर बुधवार को एस.एन. सेन बी.वी.पीजी कॉलेज में मिशन निडर एवं महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘The Unmute Project’ के तहत विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ तनाव, अवसाद और आत्महत्या जैसे गंभीर विषयों पर खुलकर संवाद के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत मिशन निडर की संस्थापिका शिखा शुक्ला ने की। उन्होंने अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं पर खुलकर बात करना बचाव की पहली सीढ़ी है। युवाओं के लिए अपनी भावनाओं को पहचानना, उन्हें व्यक्त करना और जरूरत पड़ने पर मदद मांगना बेहद जरूरी है।

कार्यशाला की मुख्य वक्ता काउंसलर एवं थेरेपिस्ट डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग और संवाद के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने आत्महत्या से जुड़े विचारों के संकेतों को पहचानने तथा समय रहते उचित मदद लेने के तरीकों पर विस्तार से मार्गदर्शन किया।

डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने कहा कि “बात करने से बात बनती है, चुप रहने से मन का बोझ बढ़ता है।” उन्होंने छात्राओं को अपनी भावनाओं और परेशानियों को दबाने के बजाय विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करने के लिए प्रेरित किया।

इस दौरान छात्राओं ने भी अपनी मानसिक परेशानियों, तनाव और व्यक्तिगत चिंताओं को खुलकर साझा किया। डॉ. प्रज्ञा ने उनकी बातों को सुनते हुए उन्हें व्यावहारिक समाधान और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।

मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका सहाय ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा और समय पर काउंसलिंग युवाओं को कई गंभीर परिस्थितियों से बाहर निकलने में मदद कर सकती है।

कार्यक्रम में मिशन निडर टीम की ओर से प्रतिमा गुप्ता, शिखा सिंह और तूलिका मित्रा, एनसीसी प्रभारी डॉ. प्रीति यादव, प्रो. निशि प्रकाश, प्रो. रेखा चौबे और कैप्टन ममता अग्रवाल सहित महाविद्यालय की बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं। कार्यशाला के माध्यम से छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनने और जरूरत के समय संवाद व सहायता का रास्ता अपनाने का संदेश दिया गया।

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