HomeNEWSIIT कानपुर और पुलिस की नई पहल, घर से जाने वाली महिलाओं-बच्चियों...

IIT कानपुर और पुलिस की नई पहल, घर से जाने वाली महिलाओं-बच्चियों के मामलों की खुलेगी परत

IIT कानपुर, कानपुर देहात पुलिस और Cute Brains Pvt. Ltd. के बीच MoU, 22 बिंदुओं पर होगा वैज्ञानिक आकलन; कारणों की पहचान कर रोकथाम के लिए बनेगी प्रभावी कार्ययोजना

  • ज्योति सिंह

कानपुर नगर। महिला एवं बाल सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कानपुर देहात पुलिस, आईआईटी कानपुर और Cute Brains Pvt. Ltd. ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत घर से बिना बताए जाने वाली बच्चियों एवं महिलाओं के वापस लौटने के बाद उनकी मनःस्थिति, परिस्थितियों और घर से जाने के कारणों को वैज्ञानिक तरीके से समझने का प्रयास किया जाएगा।

जोनल कार्यालय कानपुर में अनुपम कुलश्रेष्ठ की उपस्थिति में इस संबंध में कानपुर देहात पुलिस, आईआईटी कानपुर और Cute Brains Pvt. Ltd. के बीच Memorandum of Understanding (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। MoU पर आईआईटी कानपुर के उप निदेशक डॉ. ब्रजभूषण, प्रोफेसर जयंधरन, डीन आरएंडडी, आईआईटी कानपुर तथा कानपुर देहात की पुलिस अधीक्षक श्रीमती श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने हस्ताक्षर किए।

22 बिंदुओं पर होगा वैज्ञानिक आकलन

इस पहल के तहत घर से बिना बताए जाने वाली बच्चियों और महिलाओं के वापस आने के बाद 22 बिंदुओं पर आधारित वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसके माध्यम से उनके घर से जाने के कारणों, परिस्थितियों, मानसिक स्थिति और आवश्यकताओं को समझने का प्रयास किया जाएगा।

प्राप्त जानकारी के आधार पर संबंधित मामलों में उचित परामर्श और आवश्यक हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जाएगा। इससे पुलिस और संबंधित संस्थाओं को संवेदनशील मामलों को बेहतर तरीके से समझने तथा प्रभावित महिलाओं और बच्चियों की जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

दोबारा ऐसे मामले रोकने की बनेगी रणनीति

वैज्ञानिक आकलन से सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी और व्यवहारिक कार्ययोजना विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि घर से जाने के पीछे छिपे कारणों को समझकर भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम के उपाय विकसित करना भी है।

तकनीक और पुलिसिंग का होगा समन्वय

आईआईटी कानपुर की तकनीकी एवं वैज्ञानिक विशेषज्ञता को पुलिसिंग से जोड़ने वाली इस पहल को महिला एवं बाल सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वैज्ञानिक विश्लेषण और पुलिसिंग के समन्वय से संवेदनशील मामलों में अधिक प्रभावी हस्तक्षेप और बेहतर परिणाम हासिल करने की उम्मीद है।

यह पहल महिला एवं बाल सुरक्षा व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, वैज्ञानिक और परिणामपरक बनाने के साथ-साथ भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए ठोस रणनीति तैयार करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments